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24 जुलाई 2016, फरीदाबाद  - ‘आज प्रत्येक व्यक्ति सवेरे जागते ही प्रत्येक क्षेत्र में भ्रष्टाचार का सामना करता है । प्रशासनस्वास्थ्यशिक्षापुलिस इनमें से कहीं भी आज सामान्य व्यक्ति को न्याय नहीं मिलताऐसी स्थिति है । इन प्रवृत्तियों के विरुद्ध हमने संगठित रूप से कुछ नहीं कियाइसलिए वे बलवान हो गई हैं । अतः इन समस्याआें के विरुद्ध कृति करना हमारा राष्ट्र एवं धर्म कर्तव्य ही है । सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध संगठित रूप से प्रतिकार किया जा सकता हैपर राष्ट्रीय और धार्मिक समस्याएं सुलझाने के लिए देश के स्वार्थी लोगों की लोकतांत्रिक व्यवस्था हटना ही आवश्यक है । इसलिए हमें छत्रपति शिवाजी महाराज के समान राज्यकर्ता युक्त ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना होगाऐसा मार्गदर्शन हिंदु जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शकपू. (डॉ.) चारुदत्त पिंगले जी ने किया । शारीका भवन (कश्मीरी मंदिर), सैक्टर १७फरीदाबाद में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित हिंदु संगठन सम्मेलन में वे बोल रहे थे ।
तदुपरांत मार्गदर्शन करते हुए समिति की रणरागिनी शाखा से कुकृतिका खत्री जी ने कहा कि मुठ्ठी भर दुष्प्रवृत्तियों के कारण संपूर्ण समाज आज असुरक्षित हो गया है । जीवन में अन्याय,अत्याचार का प्रतिकार कब करना होगायह समय बताकर नहीं आताइसलिए हमारा शरीर और मन निरंतर प्रतिकारक्षम रहना आवश्यक है । धर्म सुरक्षित न रहेतो राष्ट्रऔर राष्ट्र सुरक्षित न रहेतो समाज सुरक्षित नहीं रह सकता । समाजराष्ट्र और धर्म की रक्षा करनी होतो अब स्वयंसिद्ध होना ही आवश्यक है ।
प्रारंभ में दीपप्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का आरंभ किया गया । तदुपरांत सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका में दिया राष्ट्र और धर्म संबंधी वैशिष्ट्यपूर्ण मार्गदर्शन हुआ । तत्पश्‍चात हिंदु फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता हरि शंकर जैन जी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा, ‘देश का कानून अल्पसंख्यकों के लिएमानवाधिकार अल्पसंख्यकों के लिएसुविधा-सहूलियतें अल्पसंख्यकों के लिएवर्तमान में ऐसा संविधान का स्वरूप हो गया है ।’ ‘भारत एक स्वयंभू हिन्दू राष्ट्र होते हुए भी हिन्दू धर्म और धर्मीय दोनों संकट में हैं । और जो सनातन संस्था इस परंपरा के पुनरुज्जीवन के लिए कार्यरत है उसके द्वारा किए धर्मप्रसार को मिल रही सफलता कुछ धर्मनिरपेक्ष और नास्तिकतावादी दुष्प्रवृत्तियों को खटक रही हैइसलिए उन्होंने अपकीर्ति का षड्यंत्र आरंभ किया है । सरकारी तंत्र का दुरूपयोग किया जा रहा है ।’
इस अवसर पर सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित हिंदी ग्रंथ ‘रिफ्लैक्सोलॉजी’ का उपस्थित मान्यवरों द्वारा विमोचन भी किया गया ।
समाचार सूत्र :-
सुरेश मुंजाल,
हिंदु जनजागृति समिति

10 जुलाई 2016 , नई दिल्ली|  बांग्लादेश में स्थित ढाका पर जिहादी आक्रमणकारियों में से रोहन इम्तियाज और निबरस इस्लाम नामक दो आतंकवादी ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ के संस्थापक डॉ. जाकिर नाईक के भाषण से प्रेरित हुए थे, ऐसा तथ्य सामने आया है । इससे पहले ११ जुलाई २००६ कोे मुंबई की लोकल ट्रेन में हुए बमविस्फोटों में सहभागी राहिल शेख, वर्ष २००९ में न्यूयॉर्क में हुए आतंकवादी आक्रमणों का जाल बुननेवाले नजीबुल्ला जाजी और हाल ही में भाग्यनगर (हैदराबाद) में पकडे गए ‘इसिस’ के प्रमुख इब्राहिम यजदानी, ये सभी डॉ. जाकिर नाईक के भाषण से बहुत प्रभावित हुए, ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है । डॉ. जाकिर नाईक आतंकवाद को प्रोत्साहन देते हैं । इतना ही नहीं, उन्होंने हिन्दुआें के देवताआें के विषय में भी विवादास्पद वक्तव्य किया है, जिसके कारण भारत में अनेक स्थानों पर उनपर अपराध प्रविष्ट किए गए हैं । डॉ. जाकिर पर आतंकवादी गतिविधियां करने का और ओसामा बिन लादेन का तुष्टीकरण करने का आरोप होने के कारण, इंग्लैंड, कैनडा जैसे ईसाई देशों में प्रवेशबंदी है और मलेशिया जैसे इस्लामी देश में भाषण करने की बंदी है । वर्ष २०१२ में कांग्रेस शासन ने भी डॉ. जाकिर के ‘पीस टीवी’ चैनल पर देशविरोधी प्रक्षेपण करने के कारण भारत में इसके प्रक्षेपण पर प्रतिबंध लगाया गया है । तब भी भारत में अनेक मुसलमानबहुल स्थानों पर खुलेआम ‘पीस टीवी’ का प्रक्षेपण जारी ही है । ऐसे आतंकवाद को बढावा देनेवाले डॉ. जाकिर नाईक को तत्काल गिरफ्तार कर, प्रतिबंध लगाए गए उनके देशद्रोही ‘पीस टीवी’का प्रक्षेपण करनेवालों पर भी कठोर कार्यवाही की जाए, इन मांगों को लेकर जंतर मंतर, नई दिल्ली में सुबह १० से १२ बजे तक ‘राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन’ का आयोजन किया गया ।

इस समय राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन में निम्नांकित मांगें भी की गईं । कैराना (जि. शामली, उत्तरप्रदेश) विधानसभा क्षेत्र में धर्मांधों के अत्याचारों के कारण गत दो वर्षों में ३४६ हिन्दू परिवारों ने पलायन किया है । एक समय इस क्षेत्र में मुसलमानों की जनसंख्या ५४ प्रतिशत थी, जो बढकर अब ९२ प्रतिशत हो गई है । इस गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखतेे हुए केंद्र शासन द्वारा उचित कार्यवाही की जाए, कैराना के हिन्दू परिवारों का तत्काल पुनर्वसन किया जाए तथा उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए । 

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के प्रकरण में किसी भी अन्वेषण तंत्र ने सनातन संस्था को अभी तक दोषी नहीं ठहराया है । तब भी कुछ राजनीतिक पक्ष, पुरोगामी संगठन एवं तथाकथित नास्तिकवादी संगठनों द्वारा सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की अन्यायपूर्ण मांग की जा रही है । डॉ. नरेंद्र दाभोलकर तथा कॉ. गोविंद पानसरे के हत्या के विषय में पूछताछ के नाम पर पुरोगामियों की हत्याआें के प्रकरण में सनातन संस्था को इस प्रकार फंसाना अयोग्य है । न्यायालय द्वारा सनातन संस्था से संबंधित किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया है, तब भी सनातन पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जा रहा है, यह सनातन पर बडा अन्याय होगा । इस प्रकरण में पुरोगामी संगठन ‘सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाओ’ ऐसा कहकर सनातन के विरुद्ध नियमबाह्य आंदोलन कर सामाजिक तनाव निर्माण कर रहे हैं । उनपर और उनके नेताआें पर तुरंत कार्यवाही भी की जाए, ऐसी मांग भी इस समय की गई ।

लाखो मुस्लिमो को बिठाकर जिहाद का ज्ञान देने वाले ज़ाकिर नाईक के समर्थन में पुरे देश में मुस्लिम और उनके संगठन सामने आ रहे है , कश्मीर के मुस्लिम हो या केरल के मुस्लिम लीग के मुस्लिम सभी जाकिर नाईक के समर्थन में सामने निकले है।  अब देखिये इस जिहादी जाकिर नाईक की वेबसाइट पर भारत का नक्शा, अब आप आसानी से समझ सकते है की मुस्लिमो का हीरो जाकिर नाईक भारत के प्रति क्या राय रखता होगा।   ज़ाकिर नाईक की वेबसाइट पर भारत का नक्शा बिना कश्मीर के है, इसने कश्मीर काटकर पाकिस्तान में मिला रखा है। 



 सबसे घिनौनी चीज तो भारत के बहुसंख्यक समाज की चुप्पी है, इन सभी चीजों के लिए बहुसंख्यक समाज सबसे मुख्य दोषी है 

लखनऊ में शिया समुदाय के लोग हाफिज सईद, ज़ाकिर नाइक और अल बगदादी के खिलाफ उतर गए है सड़कों पर शिया समुदाय के लोगों ने इन सभी का विरोध किया.  आपको बता दें की हाफिज सईद और ज़ाकिर नाइक सुन्नी आतंकी है. वहीँ अल बगदादी का संगठन ISIS भी साफ़ शब्दों में कहें तो सुन्नी इस्लामिक संगठन है. आपको एक और बात बता दें की अली का क़त्ल करने वाले को भी ज़ाकिर नाइक पूर्ण इज़्ज़त और हीरो का दर्जा देते है। वहीँ शिया समुदाय अली को अपना खलीफा मानता है। ISIS अन्य धर्म के लोगों के साथ साथ शियाओं का भी बराबर कत्लेआम करता है, बकौल ISIS शिया भी काफ़िर है. अभी हाल ही में ISIS ने इराक की राजधानी बगदाद के शिया मार्किट पर हमला कर सैंकड़ो शियाओं की जान भी ले ली थी 

आदरणीय रविश कुमार जी
नमस्कार.
सर, ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉग, फेस टाइम के दौर में आपने चिट्ठी लिखने की परंपरा को ज़िंदा रखा है उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं. हो सकता है कि चिट्ठियां लिखने की वजह ये भी हो कि ट्विटर, फेसबुक पे लोग जवाब दे देते हैं और चिट्ठी का जवाब मिलने की उम्मीद न के बराबर रहती है, इस लिए चिट्ठी लिखने का हौसला बढ़ जाता हो. पर हमेशा की तरह एक बार फिर, आपने कम से कम मुझे तो प्रेरित किया ही है कि एक चिट्ठी मैं भी लिखूं – इस बात से बेपरवाह हो कर – कि इसका जवाब आएगा या नहीं.
ये चिट्ठी लिखने के पहले मैंने आपकी लिखी बहुत सी चिट्ठियां पढ़ीं. अभी अभी बिलकुल. इंटरनेट पर ढूंढ कर. एनडीटीवी की वेबसाइट पर जा कर. आपके ब्लॉग को खंगाल कर. एम जे अकबर को लिखी आपकी हालिया चिट्ठी देखी. पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी देखी. मुख्यमंत्रियों के नाम आपकी चिट्ठी देखी. विजय माल्या के नाम की चिट्ठी देखी. पुलिस वालों के नाम भी आपकी चिट्ठी देखी.
सर लेकिन बहुत ढूंढने पर भी मैं आपकी वरिष्ठ और बेहद पुरानी सहयोगी बरखा दत्त के नाम की खुली चिट्ठी नहीं ढूंढ पाया, जिसमें आपने पूछा होता कि नीरा राडिया के टेप्स में मंत्रियों से काम करा देने की गारंटी लेना अगर दलाली है – तो क्या आपको दलाल कहे जाने के लिए वो ज़िम्मेदारी लेंगी ?
बहुत तलाशने के बाद भी मैं आपके किसी ठिकाने पर वरिष्ठ पत्रकार और संपादक रहे आशुतोष जी (जो अब आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं) के नाम आपकी कोई खुली चिट्ठी नहीं ढूंढ पाया, जिसमें आपने पूछा होता कि साल-डेढ़ साल तक स्टूडियो में हॉट-सीट पर बैठ कर , अन्ना के पक्ष में किताब लिखना और फिर उस मेहनत कूपन को पार्टी प्रवक्ता की कुर्सी के बदले रिडीम करा लेना अगर दलाली है – तो क्या आपको दलाल कहे जाने के लिए वो ज़िम्मेदारी लेंगे?
सर मैंने बहुत ढूंढा, लेकिन मैं आपके पत्रों में आशीष खेतान के नाम कोई चिट्ठी नहीं ढूढ पाया, जिसमें आपने पूछा होता कि सवालों में घिरे कई स्टिंग ऑपरेशनों, प्रशांत भूषण जी के बताए पक्षपातपूर्ण टू जी रिपोर्ताजों के बीच निष्पक्ष होने का दावा करते अचानक एक पार्टी का प्रवक्ता हो जाना अगर दलाली है – तो क्या वो आपको दलाल कहे जाने की ज़िम्मेदारी शेयर करेंगे ?
सर मैं अब भी ढूंढ रहा हूं. लेकिन राजदीप सरदेसाई के नाम आपका कोई पत्र मिल ही नहीं रहा. जिसमें आपने पूछा हो कि 14 साल तक एक ही घटना की एक ही तरफ़ा रिपोर्टिंग और उस घटना के दौरान आए एक पुलिस अफसर की मदद के लिए अदालत की तल्ख टिप्पणियों के बावजूद, वो हाल ही में टीवी चैनल के संपादक होते हुए गोवा में आम आदमी पार्टी की रैली में जिस तरह माहौल टटोल रहे थे, अगर वो दलाली है, तो क्या राजदीप जी आपको दलाल कहे जाने की ज़िम्मेदारी लेंगे?
सर मैंने बहुत तलाशा. लेकिन मैं उन सब पत्रकार (पढ़ें रिपोर्टर) दोस्तों के नाम आपकी कोई चिट्ठी नही ढूंढ पाया, जिन्हें दिल्ली सरकार ने ईनाम के तौर पर कॉलेजों की कमेटियों का सम्मानित सदस्य बना दिया. सर जब लोग आ कर कहते हैं कि आपका फलां साथी रसूख वाला है, उससे कह के दिल्ली के कॉलेज में बच्चे का एडमिशन करा दीजिए. आपका मन नहीं करता उनमें से किसी से पूछने का कि क्या वो आपको दलाल कहे जाने की ज़िम्मेदारी आपके साथ बांटेंगे ?
पत्रकारों का राजनीति में जाना कोई नई बात नहीं है. आप ही की चिट्ठियों को पढ़ के ये बात याद आई. लेकिन पत्रकारों का पत्रकार रहते हुए एक्टिविस्ट हो जाना, और एक्टिविस्ट होते हुए पार्टी के लिए बिछ जाना – ये अन्ना आंदोलन के बाद से ही देखा. लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ़ थी. मैं भी जाता था अपनी 3 साल की बेटी को कंधे पर ले कर. मैं भीड़ में था. आप मंच पर थे. तब लगा था कि क्रांतिकारी पत्रकार ऐसे होते हैं. लेकिन फिर इंटरव्यू में किरण बेदी को दौड़ाते और अरविंद केजरीवाल को सहलाते आपको देखा तो उसी मंच से दिए आपके भाषण याद आ गए.
क्रांतिकारी से याद आया, आपकी चिट्ठियों में प्रसून बाजपेयी जी के नाम भी कोई पत्र नहीं ढूंढ पाया. जिसमें आपने पूछ दिया हो कि इंटरव्यू का कौन सा हिस्सा चलाना है, कौन सा नहीं, ये इंटरव्यू देने वाले से ही मिल के तय करना अगर दलाली है – तो क्या वो आपको दलाल कहे जाने की ज़िम्मेदारी लेंगे ?
सर गाली तो लोग मुझे भी देते हैं. वही सब जो आपको देते हैं. बल्कि मुझे तो राष्ट्रवादी भी ऐसे कहा जाता है कि जैसे राष्ट्रवादी होना गाली ही हो. और सर साथ साथ आपसे सीखने की नसीहत भी दे जाते हैं. पर क्या सीखूं आपसे ? आदर्शवादी ब्लॉग लिखने के साथ साथ काले धन की जांच के दायरे में फंसे चैनल की मार्केटिंग करना ?
सर कभी आपका मन नहीं किया आप प्रणय रॉय जी को एक खुली चिट्ठी लिखें. उनसे पूछें कि तमाम पारिवारिक-राजनीतिक गठजोड़ (इसे रिश्तेदारी भी पढ़ सकते हैं) के बीच – आतंकियों की पैरवी करने की वजह से, देश के टुकड़े करने के नारे लगाने वालों की वकालत करने की वजह से, लगभग हर उस चीज़ की पैरवी करने की वजह से जो देश के बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को आहत करती हो – अगर लोग आपको दलाल कहने लगे हैं तो क्या वो इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे ?
उम्मीद करता हूं आप मेरे पत्र को अन्यथा नहीं लेंगे. वैसे भी आपकी चिट्ठी की तरह सारे सोशल मीडिया ब्लॉग्स और अखबार मेरे लिखे को हाथों हाथ नहीं लेंगे. लेकिन आपकी राजनीतिक/गैर राजनीतिक सेनाएं इस चिट्ठी के बाद मेरा जीना हराम कर देंगी ये मैं जानता हूं. जिन लोगों का ज़िक्र मेरी चिट्ठी में आया है – वो शायद कभी किसी संस्थान में दोबारा नौकरी भी न पाने दें. पर सर मैं ट्विटर से फिर भी भागूंगा नहीं. न ही आपको ब्लॉक कर दूंगा (मुझे आज ही पता लगा कि आपने मुझे ब्लॉक किया हुआ है, जबकि मेरे आपके बीच ये पहला संवाद है, न ही मैंने कभी आपके लिए कोई ट्वीट किया, नामालूम ये कड़वाहट आपमें क्यों आई होगी, खैर).
सर आप भगवान में नहीं मानते शायद, मैं मानता हूं. और उसी से डरता भी हूं. उसी के डर से मैंने आप जैसे कई बड़े लोगों को देखने के बाद अपने आप को पत्रकार लिखना बंद कर दिया था, मीडियाकर्मी लिखने लगा. बहुत से लोग मिलते हैं जो कहते हैं पहले रवीश बहुत अच्छा लगता था, अब वो भी अपने टीवी की तरह बीमार हो गया है. शायद आप को भी मिलते हों. वो सब संघी या बीजेपी के एजेंट या दलाल नहीं होते होंगे सर. तो सबको चिट्ठियां लिखने के साथ साथ एक बार अपनी नीयत भी टटोल लेनी चाहिए, क्या जाने वो लोग सही ही कहते हों?
आपका अनुज
रोहित

जानिए साई को साई चरित्र से साईं के महा दुष्ट होने के प्रमाण :-

CH ch-1(चैप्टर-1) पहली लाइन, मैं बाबा के दर्शन करने मस्जिद गया,
CH -2(चैप्टर 2) 2nd... लास्ट पेज, बाबा हमेशा मस्जिद में रहते थे ,
Ch-23( चैप्टर 23), बाबा के मुह पर सदैव अल्लाह मालिक रहता था ,
CH -22 बाबा खाने से पहले अल फातिहा जरुर पढ़ते थे ,
CH -22, बाबा रोज कुरान पढ़ते थे ,
CH -23 बाबा ने न खुद कभी उपवास किया न किसी को करने दिया ,
Ch-38 बाबा प्रसाद में मीठ(मांस) मिला कर देते थे , ch-38, मीठ राइस उनका सबसे प्रिय भोजन था।  Ch-23, बाबा ने कहा मैं तो यावनी (मुसलमान) हूँ

Ch- 28,शिरडी पहुँचने पर जब वह मस्जिद मेँ घुसा तो बाबा अत्यन्त क्रोधित हो गये और उसे उन्होने मस्जिद मेँ आने की मनाही कर दी। वे गर्जन कर कहने लगे कि इसे बाहर निकाल दो। फिर मेधा की ओर देखकर कहने लगे कि तुम तो एक उच्च कुलीन ब्राह्मण हो और मैँ निम्न जाति का यवन (मुसलमान)। तुम्हारी जाति भ्रष्ट हो जायेगी। 

गंगाजल का अपमान :-
Ch-32 मुझे इस झंझट से दूर ही रहने दो। मैँ तो एक फकीर(मुस्लिम, हिन्दू साधू कहे जाते हैँ फकीर नहीँ) हूँ।मुझे गंगाजल से क्या प्रायोजन? 

मांसाहारी साँई बाबा :-
CH- 23 मस्जिद मेँ एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया। वह अत्यन्त दुर्बल और मरने वाला था। बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा।
CH- 23तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैँ स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करूँगा। CH-5 & 7 फकीरोँ के साथ वो आमिष(मांस) और मछली का सेवन करते थे।

CH-38 कभी वे मीठे चावल बनाते और कभी मांसमिश्रित चावल अर्थात् नमकीन पुलाव। 
CH32 - एक एकादशी के दिन उन्होँने दादा कलेकर को कुछ रूपये माँस खरीद लाने को दिये। दादा पूरे कर्मकाण्डी थे और प्रायः सभी नियमोँ का जीवन मेँ पालन किया करते थे। 
CH-38 ऐसे ही एक अवसर पर उन्होने दादा से कहा कि देखो तो नमकीन पुलाव कैसा पका है? दादा ने योँ ही मुँहदेखी कह दिया किअच्छा है। तब बाबा कहने लगे कि तुमने न अपनी आँखोँ से ही देखा है और न ही जिह्वा से स्वाद लिया, फिर तुमने यह कैसे कह दिया कि उत्तम बना है? थोड़ा ढक्कन हटाकर तो देखो। बाबा ने दादा की बाँह पकड़ी और बलपूर्वक बर्तन मेँ डालकर बोले -”अपना कट्टरपन छोड़ो और थोड़ा चखकर देखो”
जिन भाइयो को भरोषा नही है साई सचरित के इस लिंक पर जा कर सत्यापन करे
Truth of Sai in Sai Charitra

साईं  से सिद्ध होता है की साईं बाबा एक मुसिलम थे और मांसहारी भी थे फिर साई कि पूजा क्यों अगर पूजा ही करनी है तो सनातन देवी देवताओ कि करो जब भगवान कृष्ण ने गीता में खुद कहा है

र्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥२- ४७॥
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो

और गौस्वामी तुलसी दास जी भी लिखते है कर्म प्रधान विस्व करी रखा जो जस करई सो तस फल चाखा जब कर्म ही प्रधान है तो फिर सांसारिक वासनाओ के लिए साई कि पूजा क्यों क्या कोई बुध्धिजीवी मुझे जबाब दे सकता है

फ़िल्मी अभिनेता शाहरुख़ खान  प्रेमी, जिहादी, आतंक प्रेमी होने के आरोप लगते ही रहते है  ऐसा नहीं है की शाहरुख़ खान पर ये आरोप बिलकुल बेबुनियाद लगते है। शाहरुख़ खान की गतिविधियाँ ही इतनी संदिग्ध है की उनपर इस तरह के आरोप लगना लाजमी है  दरअसल 2010 में शाहरुख़ खान की इस्लामिक कट्टरपंथी ज़ाकिर नाईक से मुलाकात हुई थी ज़ाकिर वही  कट्टरपंथी है 
 जिसे कई  आतंकवादी अपना गुरु बता चुके हैं, कई देशों में ज़ाकिर के घुसने पर  भी बैन है, ज़ाकिर नाईक वही कट्टरपंथी है जिसने कहा था की ओसामा बिन लादेन आतंकवादी नहीं बल्कि हीरो है 

 जिस कट्टरपंथी ने आतंकवादी लादेन को हीरो बताया था, जो सैंकड़ो आतंकवादियों का गुरु है शाहरुख़ खान उस से मिलकर कितनी ख़ुशी  जाहिर कर रहे थे, तथा शाहरुख़ खान ने ज़ाकिर नाईक की जमकर तारीफ भी की, ऐसा प्रतीत होता है की ज़ाकिर से मिलकर शाहरुख़ खान ने आतंकवाद का खूब सार ज्ञान भी हांसिल कर लिया जिस से वो बेहद खुश थे 

अब शाहरुख़ खान पर जिहादी होने के आरोप ना लगे तो क्या लगे  

कट्टर इस्लामिक जाकिर नैक जो कुरान, हदीथ, इस्लाम हर चीज के बारे में सबकुछ जानता है  उसने भी आख़िरकार स्वीकारा  की उसके पूर्वज हिन्दू ही थे। अब हर भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी मुसलमान को ये स्वीकार कर लेना चाहिए की उन  सभी के पूर्वज हिन्दू ही थे कोई तुर्क, अरबी नहीं और मुस्लिम हमलावरों ने हमला कर बहुतों के पूर्वजो का कत्लेआम  और धर्मान्तरण किया और आज भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के तमाम मुस्लिम उन्ही हिन्दू पूर्वजो की संतान है जिनपर अरबी, तुर्क मुस्लिमो ने अत्याचार किये थे 
देखिये ज़ाकिर नाईक स्वयं स्वीकार कर रहा है
वीडियो देखने के बाद आप समझ गए होंगे, जब जाकिर नाईक ने ये कहा की उनके पूर्वज हिन्दू थे तो उसने एक मुस्कान भी दी 

इस से साफ़ होता है की वो जानता है की भारत में कोई मुस्लिम नहीं है सब हिन्दुओ की ही संतान है 

 अक्सर  अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में रहती है तस्लीमा नसरीन आपको बता दे  कि   तस्लीमा नसरीन ने अपने ताजा  बयान में  कहा है की पूरी दुनिया में मुस्लिम आतंकी अल्लाह  हू अकबर का नारा लगाकर लोगों का क़त्ल कर रहे है।  साथ ही तस्लीमा ने कहा की आज की दुनिया में अल्लाह हु अकबर सबसे डरावना शब्द बन चूका है।  आपको बता दें की कई ऐसे उदाहरण आ चुके है जहाँ अल्लाह हु अकबर कहने पर लोगों को प्लेन तक से आतंकी समझ कर उतार दिया गया है
कहा कि  दुनिया भर में आतंकी अपनी हैवानी करतूतो से पहले अल्लाह हु अकबर जरूर बोलते है। 

ISIS आतंकियों को कानूनी मदद के मुद्दे पर ओवैसी के खिलाफ केस दर्ज पांच गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों को कानूनी मदद उपलब्ध कराने के फैसले को लेकर एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ रविवार को एक पुलिस शिकायत दर्ज हुई जबकि देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की मांग करते हुए मेरठ की एक अदालत में याचिका दायर की गयी। वहीं भाजपा और जदयू ने उनके खिलाफ कार्रवाई तथा तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
भाजपा ने आईएसआईएस माड्यूल का सदस्य होने के संदेह में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को कानूनी मदद मुहैया कराने के फैसले को लेकर ओवैसी की आलोचना की और उन पर देश को ‘‘धोखा’’ देने का आरोप लगाया। पार्टी ने आतंकवादी समूह की ‘‘मदद’’ के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने हैदराबाद से लोकसभा सदस्य की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और टीआरएस सरकार से उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने को कहा। जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने भी ओवैसी को गिरफ्तार किए जाने की मांग की।
वहीं ओवैसी ने कहा कि कानूनी मदद की पेशकश की बात को ‘‘बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है’’ तथा अदालत इस पर गौर कर सकती है। हैदराबाद में एक अधिवक्ता के करुणा सागर ने सरूर नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराकर मामला दर्ज करने की मांग की।
हालांकि सरूर नगर थाने के निरीक्षक एस लिगैया ने कहा, ‘‘हमें हैदराबाद सांसद के खिलाफ शिकायत मिली है। कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है और हम कानूनी सलाह ले रहे हैं।’’ उधर यूपी बार काउंसिल के सदस्य अनिल कुमार बख्शी ने ओवैसी के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर की है। बख्शी के अनुसार ओवैसी का बयान देशद्रोह के समान है और साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि वह आंतकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। बख्शी ने कहा कि उन्होंने शनिवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक शिकायत दायर की और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज करने का अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि शिकायत पर छह जुलाई को सुनवाई होगी।
ओवैसी ने शुक्रवार को कहा था कि उनकी पार्टी उन लोगों को कानूनी मदद उपलब्ध कराएगी जिन्हें एनआईए ने कथित रूप से आईएस मॉड्यूल से जुड़े होने के संदेह में गिरफ्तार किया है। हालांकि उन्होंने जोर दिया कि उनकी पार्टी आतंकवादी का समर्थन नहीं करती।

म्यानमार में बौद्धों की भीड़ ने एक सप्ताह में दो मस्जिद को जलाकर मुसलमान को वहां से भगा दिया, मुस्लिम डरे हुए है, 

असल में म्यांमार में लोकल ऑथोरिटी ने ब्रिज कंस्ट्रक्शन के लिए मस्जिद के नेताओ को मस्जिद को हटाने के लिए 30 जून की डेडलाइन बताई थी डेडलाइन के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई फिर गाँव वालो ने 2 जुलाई को पूरे गाँव वालो ने उस मस्जिद में आग लगा दी और तोड़ डाला और सभी मुसलमानों और नेताओ को गाँव से भगा दिया, 

म्यानमार में प्रतिदिन मुसलमानों के प्रति रोष बढ़ रहा है, लोकतंत्र के नाम पर स्टेट कौन्सेलर बनी आंग सान सू की भी इस मुद्दे पर चुप है, ऊपर से सू ने मुसलमानों को रोहतंग मानने से भी इंकार कर दिया और कहा ये मुसलमान बंगलादेशी है,  

सभी मुस्लिमो को म्यांमार देश से भगाने और देश को सम्पूर्ण बौद्ध राष्ट्र बनाने में वहां के नागरिको को सरकार का भी सहयोग मिल रहा है, बौद्धों का आरोप है की म्यांमार की शांति और संस्कृति को मुसलमान ख़त्म करना चाह रहे है इसलिए उन्हें मजबूरन हथियार उठाना पड़ा है

आपको बता दें की स्थानीय बौद्ध किसी प्रकार की इस्लामी गतिविधि के खिलाफ हो गए है और यहाँ तक की म्यांमार की सरकार भी बौद्धों के आक्रोश के बीच में आना नहीं चाहती

हिन्दू होने की क्या सजा मिली ये आज हम आपको बताएँगे 
एक रिपोर्टर हिन्दू है इसलिए उसे ऑफिस में दूसरे गिलास से पानी पीने को मजबूर किया गया 
एक हिन्दू पत्रकार को कराची में अगल गिलास में पानी पीने को मजबूर किया गया चुकी ऑफिस को पता चला की वो हिन्दू है 
दरअसल "साहिब खान ओढ़" नाम का ये पत्रकार एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ पाकिस्तान में सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम कर रहा था इस रिपोर्टर ने इस्लामाबाद के क़ायदे आज़म यूनिवर्सिटी से डिग्री भी हांसिल करी है जो की पाकिस्तान की टॉप यूनिवर्सिटी में से एक है जिसके बाद कराची स्थित एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ पाकिस्तान में इसका ट्रांसफर किया गया। सबकुछ ठीक चल रहा था की अचानक एक दिन साहिब खान ओढ़ का बेटा किसी काम से ऑफिस आया और जब वहां के मुस्लिम स्टाफ को पता चला की साहिब खान के बेटे का नाम तो "राज कुमार" है तब सबको पता चला की ये मुस्लिम नहीं एक हिन्दू है दरसल मुसलमानो द्वारा भेदभाव इतना अधिक है पाकिस्तान में की वहां आम हिन्दू भी डर के कारण मुस्लिम नाम रखते है और मुस्लिमो जैसे कपडे पहनते है की कोई क़त्ल ही ना कर दे 
जैसे ही ऑफिस को पता चला साहिब खान ओढ़ मुस्लिम नहीं हिन्दू है उसी दिन से वहां का कर्मचारी उनको अलग गिलास में पानी देने लगा 
जब साहिब खान ओढ़ जो की सीनियर रिपोर्टर है उन्होंने कर्मचारी को डांटा तो उसने उल्टा इनको गालियां सूना दी और काफिर काफिर कहने लगा 
पूरा ऑफिस भी एक हो गया और साहिब  उसी गंदे गिलास से पानी पीने को मजबूर किया गया 
आपको बता दें की जिस तरह भारत में दिल्ली यूनिवर्सिटी एक टॉप की यूनिवर्सिटी है जहाँ का उसी तरह पाकिस्तान में सिंध यूनिवर्सिटी और क़ायदे आज़म यूनिवर्सिटी टॉप की यूनिवर्सिटी है, और इन दोनों की यूनिवर्सिटी से साहिब ने  डिग्री ली है और साहिब इतने टैलंटेड है की उन्हें सीनियर रिपोर्टर बना दिया गया पर बिचारे है तो हिन्दू इसलिए एक पानी पिलाने वाले ने भी गाली सुनाई 
हिन्दुओ पर हो रहे इस तरह के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं है, बिचारे हिन्दुओ का ये हाल है की वो डरके मुस्लिम नाम रखते है 

रघुराम राजन के पास अर्थशास्त्र की डिग्री तक नहीं हैं और वो RBI गवर्नर हैं! 
आप बिना डिग्री डॉक्टर या इंजीनियर बन सकते हैं? 
देखिए, आज यदि किसी के पास पत्रकारिता का डिप्लोमा या डिग्री नहीं है तो मुख्यधारा की मीडिया में उसकी एंट्री तक नहीं हो पाती, 
जबकि पत्रकारिता के लिए पत्रकारिता से अधिक अन्य विषयों की जानकारी ज्यादा महत्वपूर्ण है! MBBS के बिना आप डॉ और IIT या समकक्ष डिग्री के बिना आप इंजीनियर नहीं बन सकते! लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर आप बिना इकोनोमी पढ़े भी बन सकते हैं! जी हां, RBI गवर्नर रघुराम राजन के पास अर्थशास्त्र की कोई डिग्री नहीं है! लेकिन रॉकफेलर की फंडिंग से लिखी थिसिस ने उन्हें दुनिया के सबसे बड़े अर्थशास्त्री के रूप में ख्याति दिला रखी है! 
अपने यहां पत्रकारिता की डिग्री नहीं रखने वालों को नौकरी नहीं देने वाले दलाल-मठाधीश पत्रकार रघु राजन के लिए चिल्ला रहे हैं! क्या पाखंड, क्या दोगलापन है!
बिजनस लाइन को डा सुब्रमण्यम स्वामी ने एक साक्षात्कार दिया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि जब मोदी सरकार सत्ता में आई भी नहीं थी, तब से (2013) वह राजन को हटाने की बात उठा रहे हैं! एक तो राजन अमेरिका के ग्रीन कार्ड होल्डर है, दूसरा RBI के गवर्नर बने राजन ने अर्थशास्त्र में पढ़ाई तक नहीं की है! 
कांग्रेस का तो समझ में आता है कि उनकी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, दोनों आधे-अधूरे पढ़े हैं, लेकिनसेक्युलर पत्रकारों व मीडिया हाउसों का क्या जो पत्रकारिता की डिग्री-डिप्लोमा का धंधा चला रहे हैं और बगैर डिग्री धारी रघु के लिए जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं!
और इन्ही सेक्युलर तत्वों के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक राष्ट्रवादी व्यक्ति सुब्रमण्यम स्वामी पर निशाना साध दिया, प्रधानमंत्री अब सेक्युलर तत्वों के आगे घुटने तक कर राष्ट्रवादी लोगों का अपमान करने लगे है
आपको बता दें की जबसे रघुराम राजन RBI के गवर्नर बने थे तब से ही भाजपा कार्यकर्त्ता भी उन्हें IMF का एजेंट  बताकर हटाने की मांग कर रहे है 

नोट : वैसे भाजपा तथा पुरे आरएसएस के किसी भी नेता ने देश के सबसे बड़े दुश्मन कांग्रेस के खिलाफ उतना काम नहीं किया जितना अकेले सुब्रमण्यम स्वामी ने किया है , जितने घोटाले हो 2G, कोयला घोटाला, अगस्ता घोटाला , सोनिया राहुल को कोर्ट में घसीटना हो, राम मंदिर हो, राम सेतु हो उसके लिए अकेले डॉ.स्वामी ने जो किया है उतना पूरी भाजपा और आरएसएस ने नहीं किया 

कांग्रेस को अकेले भ्रस्टाचारी पार्टी बनने वाले मोदी नहीं स्वामी थे, सोनिया और राहुल तथा पुरे कांग्रेस का पर्दाफाश करने वाले नरेंद्र मोदी नहीं सुब्रमण्यम स्वामी है, 
2014 में मोदी प्रधानमंत्री बने इसमें सबसे अधिक योगदान डॉ.स्वामी और बाबा रामदेव का ही था, अरुण जेटली या राजनाथ सिंह का नहीं 

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