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कश्मीर में मारे गए हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के समर्थन में पुलवामा और दक्षणि श्रीनगर में हिंसक प्रदर्शन कर रहे मुसलमानो पर सुरक्षाबलों ने सख्त रुख अपना लिया है।  आपको बता दें की पुलवामा और श्रीनगर में मुसलमान हज़ारो की संख्या में सड़क पर उतर गए फिर बुरहान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।  मुस्लिमो ने स्थानीय भाजपा के दफ्तर पर भी हमला किया है साथ ही दक्षणि श्रीनगर के 5 पुलिस चौकी के भी जलाये जाने की खबर है इसके अलावा सुरक्षाबलों पर मुस्लिमो ने पत्थरबाजी भी की हिंसक भीड़ को सँभालने के लिए सुरक्षाबलों को बल प्रयोग की इज़ाज़त दे दी गयी जिसके बाद 5 मुस्लिमो की मौत हो चुकी है साथ ही 50 से अधिक घायल बताये जा रहे है
फ़िलहाल पुरे इलाके में तनाव का माहौल है, आतंकी बुरहान के जनाजे में भी लाखो मुस्लिम इखट्टा हुए थे।

लखनऊ में शिया समुदाय के लोग हाफिज सईद, ज़ाकिर नाइक और अल बगदादी के खिलाफ उतर गए है सड़कों पर शिया समुदाय के लोगों ने इन सभी का विरोध किया.  आपको बता दें की हाफिज सईद और ज़ाकिर नाइक सुन्नी आतंकी है. वहीँ अल बगदादी का संगठन ISIS भी साफ़ शब्दों में कहें तो सुन्नी इस्लामिक संगठन है. आपको एक और बात बता दें की अली का क़त्ल करने वाले को भी ज़ाकिर नाइक पूर्ण इज़्ज़त और हीरो का दर्जा देते है। वहीँ शिया समुदाय अली को अपना खलीफा मानता है। ISIS अन्य धर्म के लोगों के साथ साथ शियाओं का भी बराबर कत्लेआम करता है, बकौल ISIS शिया भी काफ़िर है. अभी हाल ही में ISIS ने इराक की राजधानी बगदाद के शिया मार्किट पर हमला कर सैंकड़ो शियाओं की जान भी ले ली थी 

जैसा की हम सब देख रहे है कि  गत कुछ दशकों से मजारों को मंदिरों की भांति महिमामंडित करने का जोरदार अभियान देश में चल रहा है।  इनके उर्सों पे प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक भाग ले रहे हैं। इनको धार्मिक भेदभाव से

ऊपर सच्चा मानवतावादी बताया जा रहा है। हालांकि इनकी दरगाहों पे जाने वाले 80% पथभ्रष्ट हिन्दू ही
होते हैं। आज आपको ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में बताते हैं। सिरत अल क़ुतुब के अनुसार इसने 7 लाख हिन्दुवों को अपने जीवनकाल में मुस्लमान बनाया था। मजलिस सूफिया नामक ग्रंथ के अनुसार जब वह मक्का हज करने गया तो उसे ये निर्देश दिया गया की वो हिंदुस्तान जाये और वहां पर कुफ्र के अंधकार को दूर करके वहां इस्लाम का राज स्थापित करे।
मारकत इसरार नमक ग्रंथ के अनुसार इसने तीसरी शादी एक हिन्दू लड़की को जनरन धर्मान्तरित करके
की थी वो बेचारी बेबस किशोरी एक हिन्दू राजा की पुत्री थी जिसे वह उसके पिता को हराकर
जबरन उठा लाया था। इस बेचारी का नाम चिश्ती ने उम्मत अल्लाह रखा इससे हुयी पुत्री का नाम
हफिजा जमाल रखा जिसकी मजार चिश्ती की ही दरगाह में मौजूद है।

तारिख ए औलिया के मुताबिक ख्वाजा ने अजमेर नरेश पृथ्वीराज चौहान को मुस्लमान बनने की
दावत दी। चौहान के इंकार करने पर ख्वाजा ने कहा ये इस्लाम पर इमान नहीं लाता मैं इसे लश्करे
इस्लाम के हवाले जिंदा गिरफ्तार करवा दूंगा। चिश्ती ने मोहम्मद गौरी को भारत पे आक्रमण करने
को बुलाया। 

पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार गौरी को युद्ध में हराया और हर बार गौरी कुरान की कसम खा के पैरों में पड़ जाता और पृथ्वी उसे क्षमा कर देते पर 17वें युद्ध में वो जयचंद की गद्दारी के कारन पृथ्वी पराजित हुए। गौरी उन्हें बंदी बना ले गया।

हलाकि हिंदू गौरव पृथ्वी ने गौरी को अपने शब्दभेदी बाण से मार गिराया। पृथ्वी के बाद चिश्ती ने अजमेर के सारे
मंदिर तुड़वा दिए और उनके मलबे से एक मस्जिद बनवाई जिसका नाम है ढाई दिन का झोपड़ा।

सवाल ये है की यदि चिश्ती वाकई सब धर्मों को एक मानता था तो उसने 7 लाख हिंदुओं को जबरन
मुसलमान क्यों बनाया...?
क्या ये मानवता है की एक किशोरी का जबरन धर्मपरिवर्तन करा के उससे बलात निकाह
किया जाये...?

उसने गौरी को हिन्दू मंदिरों को तोड़ने को क्यों प्रेरित किया...? ये प्रश्न ऐसे हैं जिस पे हमे गंभीरता से
विचार करने योग्य है । क्या अब भी  ऐसी दरगाह पे जाना चाहेंगे आप ..?

म्यानमार में बौद्धों की भीड़ ने एक सप्ताह में दो मस्जिद को जलाकर मुसलमान को वहां से भगा दिया, मुस्लिम डरे हुए है, 

असल में म्यांमार में लोकल ऑथोरिटी ने ब्रिज कंस्ट्रक्शन के लिए मस्जिद के नेताओ को मस्जिद को हटाने के लिए 30 जून की डेडलाइन बताई थी डेडलाइन के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई फिर गाँव वालो ने 2 जुलाई को पूरे गाँव वालो ने उस मस्जिद में आग लगा दी और तोड़ डाला और सभी मुसलमानों और नेताओ को गाँव से भगा दिया, 

म्यानमार में प्रतिदिन मुसलमानों के प्रति रोष बढ़ रहा है, लोकतंत्र के नाम पर स्टेट कौन्सेलर बनी आंग सान सू की भी इस मुद्दे पर चुप है, ऊपर से सू ने मुसलमानों को रोहतंग मानने से भी इंकार कर दिया और कहा ये मुसलमान बंगलादेशी है,  

सभी मुस्लिमो को म्यांमार देश से भगाने और देश को सम्पूर्ण बौद्ध राष्ट्र बनाने में वहां के नागरिको को सरकार का भी सहयोग मिल रहा है, बौद्धों का आरोप है की म्यांमार की शांति और संस्कृति को मुसलमान ख़त्म करना चाह रहे है इसलिए उन्हें मजबूरन हथियार उठाना पड़ा है

आपको बता दें की स्थानीय बौद्ध किसी प्रकार की इस्लामी गतिविधि के खिलाफ हो गए है और यहाँ तक की म्यांमार की सरकार भी बौद्धों के आक्रोश के बीच में आना नहीं चाहती

यह घटना तब की है  6 मार्च 1752 AD,  लाहौर (वर्तमान में पाकिस्तान) के गवर्नर मुईन उल मालिक, जिसे मीर मन्नू के नाम से भी जाना जाता है, ने उस क्षेत्र के सिखों को जान से मारने और उनकी छोटी जवान कुंवारी बेटियों को जिहादियों में बांटने का आदेश दिया | औरतों और बच्चों की सजा दूसरी तय की जानी थी जिसके लिए उन्हें भूखे प्यासे लाहौर के कारागार में बंद रखा गया था | औरतों को इस्लाम कबूल करने अथवा ना करने की सूरत में गम्भीर परिणाम भुगतने की सजा सुनाई गयी | जब इन औरतों ने मौत को सामने देखकर भी झुकना स्वीकार नहीं किया तब इस मुस्लिम सैनकों ने उनके 300 मासूम बच्चों की हत्या कर दी और उनकी लाशों को भालों की नोक पर टांग दिया गया।  यही नहीं, उन हैवानों ने बच्चों की अंतड़ियां काट कर शरीर के दूसरे हिस्से भी बाहर निकाल दिए और उनकी माला बनाकर उन माताओं के गले में पहना दिया।  

एक के बाद एक, हर सिख महिला ने मुसलमानों के ऐसे नृशंश अत्याचार सहे, लेकिन किसी ने भी उनके आगे झुककर इस्लाम स्वीकार नहीं किया | यह एक चमत्कार ही कहा जायेगा, जब तक वे मुग़ल सैनिक इन औरतों की हत्या कर पाते, सिख घुड़सवार अकालियों ने 4 नवंबर 1753 को हमला कर मीर मन्नू को मार डाला और इन महिलाओं को बचाने में कामयाब हो गए | पूरे पंजाब क्षेत्र में मुगलों द्वारा ऐसे घिनौने कार्यों के हज़ारों उदाहरण मिल जायेंगे जो सिखों ने नहीं बल्कि खुद मुग़ल इतिहासकारों ने लिखे हैं | इनमें से एक नूर अहमद चिस्ती लिखता है, ” मीर मन्नू ने एक मुस्लिम त्यौहार के दिन बहादुरी से 1100 सिखों का सर, धड़ से अलग कर दिया था।”
हैरानी की बात यह है, इन घटनाओं के दो सदियाँ बीत जाने के बाद भी इराक और सीरिया जैसे देशों में ये मुसलमान हज़ारों की संख्या में यहूदी औरतों और बच्चों को मार रहे हैं। ये मुसलमान दूसरे धर्म के लोगों को काफिर कहते हैं और खुद के द्वारा की जाने वाली हत्याओं को भी कुरान ए शरीफ से जोड़ देते हैं | मीर मन्नू ने जिन औरतों के बच्चों की हत्या की थी वे माएं क्या चाहती तो इस्लाम स्वीकार नहीं कर सकती थीं ? वे औरतें सिख धर्म को लेकर अंधी नहीं थी जिसकी वजह से उन्हें अपने बच्चों को खोना पड़ा। उन्होंने बलिदान की जो मिसाल दी वह इतिहास में सिख धर्म के सिद्धांतों की रक्षा के लिए किया गया सबसे बड़ा संघर्ष है जिसमे सैकड़ों जाने गंवानी पड़ीं थी 
सिखों ने जो संघर्ष किया अथवा बलिदान दिया उसका एकमात्र लक्ष्य किसी भी सूरत में भारत में इस्लाम धर्म के प्रसार को रोकना था | उस ज़माने में भी सिख, इस्लाम के खतरनाक इरादों को मानवता के प्रति नफरत की भावना को समझ चुके थे | इस्लाम के घृणा भरे विचारों को रोकने का एकमात्र जरिया, किसी भी सूरत में इस्लाम को स्वीकार नहीं करना था, जो उन औरतों ने किया | इस्लामिक जिहाद के आगे दुनिया की कई ताकतवर सभ्यताएं भी दम तोड़ चुकी थीं | अगर भारत ने वैसा प्रतिरोध नहीं दिखाया होता तो अब तक या तो सारे काफिर मार दिए गए होते या इस्लाम में धर्मान्तरित किये जा चुके होते | भारत के कई दूसरे लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए इस्लाम को स्वीकार कर लिया और चोरी चुपके, घर के अंदर छिपकर हिन्दू या दूसरे धर्मों का निर्वाह किया करते थे |
समय के साथ इन छिपे हुए “काफिरों” ने इस्लाम में अपनी आस्था ज्यादा बढ़ा ली और आगे चलकर पाकिस्तान को जन्म दिया, वह देश जो आज दुनिया का सबसे बड़ा आंतकवाद उत्पादक देश है | हालाँकि हिन्दू से धर्मांतरित हुए पाकिस्तानी मुसलमान, कई पीढ़ियों तक होली दीवाली जैसे हिन्दू त्यौहार मनाते रहे और कई पाकिस्तानी आज भी हिन्दू सरनेम लगते हुए देखे जा सकते हैं | यदि कोई हिन्दू अपना धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनता है तो ये मुसलमान ख़ुशी के मारे ऐसा शोर मचाते हैं मानों इस्लाम के सच्चे होने का प्रमाण दे रहे हों |
यह उन औरतों के त्याग और बलिदान का ही परिणाम है कि जो पंजाब मुगलों के साम्राज्य और उनके आक्रमणों से सबसे ज्यादा प्रभावित था, सं 1800 तक महाराजा रणजीत सिंह द्वारा शासित हो गया | रणजीत सिंह ने जिहाद के नाम पर बनायीं गयी मस्जिदों को तोड़कर तथा अज़ान के समय सड़कों पर होने वाले मुसलमानों के मार्च पर रोक लगाकर भारत में इस्लाम के प्रसार को रोक दिया | यह उन्हीं की देन है कि आज आधे से ज्यादा पंजाब, या यूँ कहें तो उत्तर भारत में इस्लाम बिलकुल भी नहीं है |

हिन्दू होने की क्या सजा मिली ये आज हम आपको बताएँगे 
एक रिपोर्टर हिन्दू है इसलिए उसे ऑफिस में दूसरे गिलास से पानी पीने को मजबूर किया गया 
एक हिन्दू पत्रकार को कराची में अगल गिलास में पानी पीने को मजबूर किया गया चुकी ऑफिस को पता चला की वो हिन्दू है 
दरअसल "साहिब खान ओढ़" नाम का ये पत्रकार एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ पाकिस्तान में सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम कर रहा था इस रिपोर्टर ने इस्लामाबाद के क़ायदे आज़म यूनिवर्सिटी से डिग्री भी हांसिल करी है जो की पाकिस्तान की टॉप यूनिवर्सिटी में से एक है जिसके बाद कराची स्थित एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ पाकिस्तान में इसका ट्रांसफर किया गया। सबकुछ ठीक चल रहा था की अचानक एक दिन साहिब खान ओढ़ का बेटा किसी काम से ऑफिस आया और जब वहां के मुस्लिम स्टाफ को पता चला की साहिब खान के बेटे का नाम तो "राज कुमार" है तब सबको पता चला की ये मुस्लिम नहीं एक हिन्दू है दरसल मुसलमानो द्वारा भेदभाव इतना अधिक है पाकिस्तान में की वहां आम हिन्दू भी डर के कारण मुस्लिम नाम रखते है और मुस्लिमो जैसे कपडे पहनते है की कोई क़त्ल ही ना कर दे 
जैसे ही ऑफिस को पता चला साहिब खान ओढ़ मुस्लिम नहीं हिन्दू है उसी दिन से वहां का कर्मचारी उनको अलग गिलास में पानी देने लगा 
जब साहिब खान ओढ़ जो की सीनियर रिपोर्टर है उन्होंने कर्मचारी को डांटा तो उसने उल्टा इनको गालियां सूना दी और काफिर काफिर कहने लगा 
पूरा ऑफिस भी एक हो गया और साहिब  उसी गंदे गिलास से पानी पीने को मजबूर किया गया 
आपको बता दें की जिस तरह भारत में दिल्ली यूनिवर्सिटी एक टॉप की यूनिवर्सिटी है जहाँ का उसी तरह पाकिस्तान में सिंध यूनिवर्सिटी और क़ायदे आज़म यूनिवर्सिटी टॉप की यूनिवर्सिटी है, और इन दोनों की यूनिवर्सिटी से साहिब ने  डिग्री ली है और साहिब इतने टैलंटेड है की उन्हें सीनियर रिपोर्टर बना दिया गया पर बिचारे है तो हिन्दू इसलिए एक पानी पिलाने वाले ने भी गाली सुनाई 
हिन्दुओ पर हो रहे इस तरह के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं है, बिचारे हिन्दुओ का ये हाल है की वो डरके मुस्लिम नाम रखते है 


पाकिस्तान में बना यह एड सोशल मीडिया पर हो रहा है वायरल

रमजा़न को इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है. रमज़ान की मूल भावना को अगर आप समझना चाहते हैं, तो आपको Surf Excel के इस नये विज्ञापन को ज़रूर देखना चाहिए, जो पाकिस्तान में बना है

Surf Excel Pakistan ने हाल ही में इस्लामिक पाक महीने रमज़ान को लेकर एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें रमज़ान में खुशियां मनाने और मदद करने की भावना को दिखाया गया है.इस विज्ञापन को Vasan Bala ने निर्देशित किया है. इस Ad को अपलोड करते ही मात्र तीन घंटे में इसे 4000 से अधिक बार शेयर किया गया.

 मुस्लिम समझ और समाज  पर हमेशा से आरोप लगते आ रहा  है कि  मुस्लिमो में औरतो को बराबरी का अधिकार नहीं है 
और सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि  जिहाद के बाद अल्लाह तो जन्नत में मर्द को 72 कुंवारी हूर देता है  पर औरतो को कुछ नहीं मिलता है  


इस बात पर  देखें इस इस्लामिक विद्वान का जवाब, जिसे  आप अगर  एक बार देख लेंगे फिर हमें कुछ कहने की जरुरत नहीं होगी 
इस इस्लामी विद्वान की पूरी बातो को सुनकर आप हस्ते हस्ते लोटपोट हो जाएंगे और आपको दुःख भी होगा की अगर विद्वान ऐसे है तो इस्लाम  में मुर्ख किसे कहेंगे 
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