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इलाहाबादः इसे अंध विश्वास कहें या कोई तमत्कार अथवां अफवाह। इलाहाबाद के बादशाही मंडी स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी राज भवन पांडेय ने जैसे ही मंदिर का कपाट खोला तो देखा कि हनुमानजी की मूर्ति में बनी आंख से पानी बह रहा था। यह देखते ही वह शोर मचाते हुए कहने लगे कि चमत्कार हो गया, पवनसुत की आंखों से आंसू निकल रहे हैं। उसकी बात सुनते ही मंदिर में लोगों की कतार लगते देर नहीं लगी। वहां पहुंचे लोगों में जितने मुंह उतनी तरह की बातें होती रही।

35 वर्ष पुराना है मंदिर
बादशाही मंडी पुलिस चौकी के समीप स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर 35 वर्ष पुराना है। पुजारी राज भवन पांडेय ने रोज की तरह जब सुबह 7 बजे पूजा करने पहुंचे, तो उन्हें मूर्ति पर पानी की कुछ बूंदें दिखाई दीं। पुजारी ने दावा कि करीब से देखने पर ऐसा अहसास हुआ मानों हनुमान जी की मूर्ति से आंसू निकल रहे हों। यह खबर बात वायरल हुई तो लोकनाथ चौराहे से लेकर शाहगंज तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इसे कोई अफवाह तो कुछ ऐसे भी थे जो चमत्कार अथवां प्राकृतिक आपदा आने का संकेत कहने से खुद को नहीं रोक सके।सेल्फी लेने व दर्शन की लगी होढ़


हनुमानजी के आंखों से आंसू की खबर सुनते ही मंदिर में लोगों का तांता लग गया। बड़े बुजुर्गो से लेकर महिलाओं और युवाओं ने हनुमानजी को फूलमाला चढ़ाना शुरू कर दिया। धक्कामुक्की के बीच कई लोग मेाबाइल में सेल्फी लेने में जुट गए। पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। लोगों ने सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ भी खूब किया। ऐसे में लोगों का कहना था कि महाशिवरात्रि पर पिछले 25 साल से वहां लगातार हनुमान जी के मंदिर में पूजा हो रही थी। लेकिन इस बार व्यवस्थापक के न रहने पर पूजा नहीं हुई। इसीलिए मूर्ति की आंखों से आंसू निकल रहे हैं।

मरक्यूरिक ऑक्साइड (HgO) के कारण दिख रही हैं पानी की बूंदें
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदम्बा सिंह का कहना है कि मूर्ति आमतौर पर पत्थर की बनी होती हैं। उस पर सिंदूर का लगातार लेपन किया जाता है। सिंदूर में मरक्यूरिक ऑक्साइड (HgO) होता है, जो पानी को सोखता रहता है। एक स्थिति ऐसी आती है जब मूर्ति में पानी की मात्रा अधिकतम स्तर तक पहुंच जाती है। ऐसे में मूर्ति पर कुछ बूंदें दिखाई दे सकती हैं। लेकिन ऐसा कुछ समय के लिए ही होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मूर्ति की आंखों से आंसू निकलने का सही कारण तो टेस्ट के बाद ही बताया जा सकता है।















24 जुलाई 2016, फरीदाबाद  - ‘आज प्रत्येक व्यक्ति सवेरे जागते ही प्रत्येक क्षेत्र में भ्रष्टाचार का सामना करता है । प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस इनमें से कहीं भी आज सामान्य व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता, ऐसी स्थिति है । इन प्रवृत्तियों के विरुद्ध हमने संगठित रूप से कुछ नहीं किया, इसलिए वे बलवान हो गई हैं । अतः इन समस्याआें के विरुद्ध कृति करना हमारा राष्ट्र एवं धर्म कर्तव्य ही है । सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध संगठित रूप से प्रतिकार किया जा सकता है; पर राष्ट्रीय और धार्मिक समस्याएं सुलझाने के लिए देश के स्वार्थी लोगों की लोकतांत्रिक व्यवस्था हटना ही आवश्यक है । इसलिए हमें छत्रपति शिवाजी महाराज के समान राज्यकर्ता युक्त ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना होगा, ऐसा मार्गदर्शन हिंदु जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक, पू. (डॉ.) चारुदत्त पिंगले जी ने किया । शारीका भवन (कश्मीरी मंदिर), सैक्टर १७, फरीदाबाद में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित हिंदु संगठन सम्मेलन में वे बोल रहे थे ।
तदुपरांत मार्गदर्शन करते हुए समिति की रणरागिनी शाखा से कु. कृतिका खत्री जी ने कहा कि मुठ्ठी भर दुष्प्रवृत्तियों के कारण संपूर्ण समाज आज असुरक्षित हो गया है । जीवन में अन्याय,अत्याचार का प्रतिकार कब करना होगा, यह समय बताकर नहीं आता; इसलिए हमारा शरीर और मन निरंतर प्रतिकारक्षम रहना आवश्यक है । धर्म सुरक्षित न रहे, तो राष्ट्र; और राष्ट्र सुरक्षित न रहे, तो समाज सुरक्षित नहीं रह सकता । समाज, राष्ट्र और धर्म की रक्षा करनी हो, तो अब स्वयंसिद्ध होना ही आवश्यक है ।
प्रारंभ में दीपप्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का आरंभ किया गया । तदुपरांत सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका में दिया राष्ट्र और धर्म संबंधी वैशिष्ट्यपूर्ण मार्गदर्शन हुआ । तत्पश्‍चात हिंदु फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता हरि शंकर जैन जी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा, ‘देश का कानून अल्पसंख्यकों के लिए, मानवाधिकार अल्पसंख्यकों के लिए, सुविधा-सहूलियतें अल्पसंख्यकों के लिए, वर्तमान में ऐसा संविधान का स्वरूप हो गया है ।’ ‘भारत एक स्वयंभू हिन्दू राष्ट्र होते हुए भी हिन्दू धर्म और धर्मीय दोनों संकट में हैं । और जो सनातन संस्था इस परंपरा के पुनरुज्जीवन के लिए कार्यरत है उसके द्वारा किए धर्मप्रसार को मिल रही सफलता कुछ धर्मनिरपेक्ष और नास्तिकतावादी दुष्प्रवृत्तियों को खटक रही है, इसलिए उन्होंने अपकीर्ति का षड्यंत्र आरंभ किया है । सरकारी तंत्र का दुरूपयोग किया जा रहा है ।’
इस अवसर पर सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित हिंदी ग्रंथ ‘रिफ्लैक्सोलॉजी’ का उपस्थित मान्यवरों द्वारा विमोचन भी किया गया ।
समाचार सूत्र :-
सुरेश मुंजाल,
हिंदु जनजागृति समिति

धर्म ग्रंथों के अनुसार, मनुष्य की मृत्यु के बाद यमदूत उसकी आत्मा को यमराज के पास ले जाते हैं। यहां यमराज उसके कर्मों के अनुसार उसे स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। नरक में उस व्यक्ति की आत्मा को क्या सजा दी जाएगी, ये भी यमराज ही तय करते हैं। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि यमराज को भी एक ऋषि के श्राप के कारण धरती पर मनुष्य के रूप में जन्म लेना पड़ा था। युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के अंतिम दौर में पूरी स्त्री जाति को एक श्राप दिया था।
क्या था वो श्राप और कुछ ऐसे ही अनोखे श्रापों के बारे में आज आपको बता रहे हैं, जिनके बारे में लोग कम ही जानते हैं-
माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप
महाभारत के अनुसार, माण्डव्य नाम के एक ऋषि थे। राजा ने भूलवश उन्हें चोरी का दोषी मानकर सूली पर चढ़ाने की सजा दी। सूली पर कुछ दिनों तक चढ़े रहने के बाद भी जब उनके प्राण नहीं निकले, तो राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने ऋषि माण्डव्य से क्षमा मांगकर उन्हें छोड़ दिया। तब ऋषि यमराज के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि मैंने अपने जीवन में ऐसा कौन-सा अपराध किया था कि मुझे इस प्रकार झूठे आरोप की सजा मिली।
तब यमराज ने बताया कि जब आप 12  वर्ष के थे, तब आपने एक फतींगे की पूंछ में सींक चुभाई थी, उसी के फलस्वरूप आपको यह कष्ट सहना पड़ा। तब ऋषि माण्डव्य ने यमराज से कहा कि 12 वर्ष की उम्र में किसी को भी धर्म-अधर्म का ज्ञान नहीं होता। तुमने छोटे अपराध का बड़ा दण्ड दिया है। इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम्हें शुद्र योनि में एक दासी पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ेगा। ऋषि माण्डव्य के इसी श्राप के कारण यमराज ने महात्मा विदुर के रूप में जन्म लिया।
आगे की स्लाइड्स में जानिए श्रापों से संबंधित कुछ अन्य प्रसंग!!
1. 
युधिष्ठिर ने क्यों दिया स्त्री जाति को श्राप?
2.  स्त्री मिलन के कारण क्यों हुई राजा पांडु की मृत्यु?
3.  नागमाता ने क्यों दिया अपने पुत्रों को श्राप?
4.  किसके श्राप से नपुंसक बने अर्जुन?
5.  श्राप के कारण आज भी भटक रहा है ये महावीर?
6.   इस श्राप के कारण हुई राजा परीक्षित की मृत्यु?
7.   गुरु परशुराम ने ही दिया था कर्ण को श्राप, क्यों?
8.   गांधारी ने क्यों दिया श्रीकृष्ण को श्राप?
9.   दक्ष ने क्यों दिया चंद्रमा को श्राप?
10. श्रीगणेश को किसने दिया था श्राप?
11. नारद ने क्यों दिया भगवान विष्णु को श्राप?
12. किस श्राप के कारण वसुओं को लेना पड़ा धरती पर जन्म?
13. इस श्राप के कारण हुआ श्रीकृष्ण के परिवार का अंत?
14. शुक्राचार्य ने क्यों दिया अपने जमाई को श्राप?
15. ये श्राप बना राजा दशरथ की मृत्यु का कारण?
16. तुलसी ने क्यों दिया भगवान विष्णु को श्राप?
युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप
महाभारत के शांति पर्व के अनुसार, युद्ध समाप्त होने के बाद जब कुंती ने युधिष्ठिर को बताया कि कर्ण तुम्हारा बड़ा भाई था तो पांडवों को बहुत दुख हुआ। तब युधिष्ठिर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का भी अंतिम संस्कार किया। माता कुंती ने जब पांडवों को कर्ण के जन्म का रहस्य बताया तो शोक में आकर युधिष्ठिर ने संपूर्ण स्त्री जाति को श्राप दिया कि- आज से कोई भी स्त्री गुप्त बात छिपा कर नहीं रख सकेगी।

भारी परेशानी के बावजूद ऐसे भक्तों की संख्या भी हजारों में है जो यह न कर बैठे है कि दर्शन किए बिना वापस नहीं जाएंगे। आस्था और उत्साह से लबरेज बाबा बर्फानी के भक्तों को यात्रा रुकने का मलाल है। इन श्रद्धालुओं के जोश पर न तो घाटी के हालात का  और न ही यात्रा रुकने से आ रही दुश्वारियों का कोई असर पड़ा है।  पवित्र गुफा तक पहुंचने के जुनून में भक्तों का कहना है मर जाएंगे, दर्शन किए बगैर वापस नहीं जाएंगे। राजस्थान से आए ग्रुप में शामिल महिला श्रद्धालु नीलम सोनी ने कहा दो दिन से भगवती नगर स्थित यात्री निवास में ठहरे हैं। चाहे बीस दिन ही क्यों न लग जाएं, दर्शन किए बिना वह लौटने वाली नहीं। 
घाटी के हालात के सवाल का जवाब देते हुए नीलम सोनी ने कहा कि पत्थर की लकीर समझ लो, मर जाएंगे, दर्शन किए बगैर हरगिज वापस नहीं जाएंगे। एक प्रतिशत भी टेंशन नहीं है। 
भूख से बेहाल यात्रियों को फुटपाथ पर गुजारनी पड़ी रात। दीपक और संजय ने कहा कि राजस्थान से उनके साथ छह बसें आई थीं। पांच लौट गई हैं। इस बस में बच्चों सहित पचास लोग हैं जो रात भर भूखे रहे। फुटपाथ पर भी सोए, लेकिन अब यात्री निवास में हैं। इन्हीं के साथ शामिल नीटू ने कहा कि महीनों पहले से बाबा बर्फानी की यात्रा की तैयारी में लग जाते हैं। 
अब चाहे जो हो जाए वे दर्शन किए बिना वापस नहीं जाएंगे। दिल्ली से आए ग्रुप में शामिल कनिका ने कहा वह पहली बार यात्रा पर आई है, परिजनों के साथ सात दिन का टूर प्लान किया है, लेकिन यहां पर आकर हालात बिगड़ गए हैं। 
कनिका सहित सुमन, दिनेश और गिरीराज ने कहा कि अमरनाथ यात्रा पर हर साल कुछ ने कुछ खलल पड़ता है। यात्रा फिर भी आगे बढ़ती है। इस बार भी श्रद्धालु हार नहीं मानेंगे। श्रद्धालुओं ने कहा हिमलिंग पिघलने की खबरें भी सुनने को मिल रही हैं लेकिन वह पवित्र गुफा के दर्शन करने के बाद ही वापस जाएंगे। मर जाएंगे पर  

जब धार्मिक स्थलों की बात होती है तो भारत की ओर बरबस ही नजर ठहर जाती है। निश्चित ही भारत धार्मिक स्थलों के मामले में अमीर है। लेकिन हम बात कर रहे हैं दुनिया के उन प्रमुख स्थलों की जो जितने प्रसिद्ध हैं उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण और विवादित भी है।  

1.कैलाश मानसरोवर : यह जहां हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण है वहीं यह बौद्ध और जैन धर्म के श्रद्धालुओं के लिए भी महत्व की  भूमि है। चूंकि यह तीर्थ भारत में होना चाहिए था , लेकिन यह अब चीन में है इसीलिए यह विवादित भी है। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि चीन में है तो सुरक्षित और साफ-सुधरा है अन्यथा 'मानसरोवर' के क्या हाल होते यह एक भारतीय से ज्यादा कौन समझ सकता है।

यह भगवान शिव का  निवास स्थान है। यहाँ भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं। 

2.काशी विश्वनाथ : इसे बनारस और वाराणसी भी कहा जाता है। भगवान शिव के त्रिशुल की नोक पर बसी है शिव की यह नगरी काशी। गंगा किनारे हजारों वर्षो पुराने हिंदुओं के इस तीर्थ स्थल पर स्थित है बता दे की  बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक काशी विश्वनाथ। पतित पावनी भागीरथी गंगा के तट पर धनुषाकारी बसी हुई यह काशी नगरी वास्तव में पाप-नाशिनी है। भगवान शंकर को यह गद्दी अत्यन्त प्रिय है इसलिए  उन्होंने इसे अपनी राजधानी एवं अपना नाम काशीनाथ रखा है।

विष्णु ने अपने चिन्तन से यहां एक पुष्कर्णी का निर्माण किया और लगभग पचास हजार वर्षों तक वे यहां घोर तपस्या करते रहे। भगवान बुद्ध ने बोध गया में ज्ञान प्राप्त कर यहीं पर अपना पहला प्रवचन दिया और जैनियों के तीन तीर्थंकरो का जन्म यहीं हुआ इसीलिए यह तीनों धर्मों के लिए पवित्र स्थल है। पुराणों में इस नगरी का बहुत विस्तृत वर्णन मिलता है। कबीर ने यहीं पर बैठकर अपने संदेश को दु‍निया में फैलाया। तुलसीदास जी ने यहीं बैठकर रामचरित मानस की रचना की।
चीनी यात्री (ह्वेनसांग) के अनुसार उसके समय में काशी मे सौ मंदिर थे, किन्तु मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सभी मंदिर ध्वस्त कर मस्जिदों का निर्माण किया। मुस्लिम काल के प्रसिद्ध शासक औरंगजेब ने इसका नाम बदलकर मस्जिदें बनाई। इसीलिए आज यह स्थान विवादित स्थल हो चला है।

3.राम की अयोध्या : भगवान राम का जन्म आज से 7124 वर्ष पूर्व अर्थात 5116 ईस्वी पूर्व अयोध्या में हुआ था। जैनियों के प्रर्थम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म भी अयोध्या में ही हुआ था। तथ्य कहते हैं कि सन् 1528 में अयोध्या में जन्मभूमि पर बने राम मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद का निर्माण किया गया। मुगल सम्राट बाबर ने ये मस्जिद बनवाई थी इसलिए इस मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद रखा गया। बाबर भारत का बादशाह नहीं था।

4.कृष्ण की मथुरा : मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यह विश्व का प्राचीन शहर है। 500 ईसा पूर्व के प्राचीन अवशेष मिले हैं, जिससे इसकी प्राचीनता सिद्ध होती है। कृष्ण जन्मभूमि हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। यह उसी तरह है जिस तरह की मदीना मुस्लिमों की आस्था का केंद्र है।

रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5123 वर्ष पूर्व) को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। इस कारागार को एक भव्य मंदिर में बदल दिया गया था, लेकिन मुस्लिम शासकों ने सन् 1669 ईस्वी में मंदिर को नष्ट कर इसकी भवन सामग्री से जन्मभूमि के आधे हिस्से पर एक भव्य ईदगाह बनवा दी गई, जो कि आज भी विद्यमान है।

5.माता वैष्णो देवी : भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के जम्मू जिले में कटरा नगर के समीप  वैष्णो देवी की पहाड़ी पर स्थित है माँ  वैष्णो देवी का यह मंदिर। वैष्णो देवी को मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। यहां पर भारत ही नहीं दुनियाभर से लोग माता के दर्शन करने आते हैं। यह भारत में तिरूमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थ स्थल है।

तो ये है दुनिया के पांच प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पहले तो भ्ररत में ही था लेकिन अब एक कैलाश मानसरोवर को छोड़कर  बाकि चार  भारत में स्थित है इससे स्पष्ट होता है की हमारा देश भारत भी प्रसिद्द है इन तीर्थ स्थलों के साथ साथ। 

इस्लामिक देश में रामायण का पाठ ! हम सब जानते है कि  रामायण भारत का सबसे बड़ा ग्रन्थ और पूजनीय पुस्तक है.
जिसकी रचना भारत देश में हुई इसलिए रामायण को भारत की धरोहर और भारतीय सस्कृति की विरासत कही जाती है.
हमारे देश  भारत में लगभग हर हिन्दू घर में रामायण की किताब देखी जा सकती है. रामायण को  हिन्दुओं का धर्म काव्य भी कहा जाता है और इसलिए उसके प्रति धार्मिक आस्था और श्रद्धा रखी जाती है.
लेकिन एक देश ऐसा भी है जो पूर्णतः मुस्लिम देश है और उस मुस्लिम देश में रामायण के प्रति जितनी आस्था और श्रद्धा है उतना शायद हीं  भारत के हिन्दुओं में  होगी.
तो आइये जानते हैं कौन सा देश है जो भारतियों से ज्यादा रामायण को महत्व देता है.
जी हाँ  इंडोनेशिया एक मुस्लिम बाहुल्य देश है.  यहाँ की 90 आबादी सिर्फ मुस्लिम है लेकिन इस मुस्लिम देश में भी आज सबसे ज्यादा रामायण की कथा, पूजा और रामायण का पाठ होता है.
रामायण को अपनी पारम्परिक धरोहर के रूप में अपने आने वाली पीढ़ियों को अनिवार्य रूप से ज्ञान के रूप में  दिया जाता है.
रामायण और रामकथा इंडोनेशिया में सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है. इस इस्लाम देश में कुरआन से ज्यादा रामायण का महत्व है. यहाँ रामायण को  रामायण ककविन कहते है. काकविन अर्थ महाकाव्य होता है. इसकी रचना कावी भाषा में की गई है. कावी जावा की प्रचीन शास्त्रीय भाषा रही  है .
रामायण एक ऐसा महाकाव्य जिसमे एक उच्च चरित्र की रचना की गई है. एक इंसान के कर्तव्य, जीवन और चरित्र का वर्णन कर समाज में एक अच्छे मानव का परिचय दिया है इसलिए इंडोनेशिया में लोग राममायन  को जीवन का अभिन्न अंग मानते है. अपनी सांस्कृतिक विरासत मानकर अपने आने वाली पीढ़ीयों को एक आर्दश जीवन और आदर्श मानव के रूप में स्थापित करने के लिए  ‘रामायण की  शिक्षा और संस्कार को अपने बच्चो को प्रारंभिक शिक्षा के रूप में देने के लिए रामायण का महत्व सिखाते है.
यहाँ लोग रामायण से इतने प्रभावित है कि इस्लाम धर्म में रह कर भी रामायण को अपनी विरासत मानते हुए हर बच्चे के जन्म और उत्सव में रामायण का पाठ करते है.
एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक फादर कामिल बुल्के अपनी एक लेख में सन  1982 लिखा था : – “35 वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने जावा के किसी गांव में एक मुस्लिम शिक्षक को रामायण पढ़ते देखकर पूछा था कि आप रामायण क्यों पढ़़ते हैं?” उत्तर मिला, “मैं अच्छा मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ता हूं.”
आपको बता दें कि  रामायण के प्रति जितना आदर और सम्मान इस देश में है उतना शायद ही कही और देखने को मिलेगा. भारत तक में रामायण को इतना महत्व और सम्मान  नहीं ही देते जितना इंडोनेशिया के मुसलमानो के मन में हैं. 

जानिए साई को साई चरित्र से साईं के महा दुष्ट होने के प्रमाण :-

CH ch-1(चैप्टर-1) पहली लाइन, मैं बाबा के दर्शन करने मस्जिद गया,
CH -2(चैप्टर 2) 2nd... लास्ट पेज, बाबा हमेशा मस्जिद में रहते थे ,
Ch-23( चैप्टर 23), बाबा के मुह पर सदैव अल्लाह मालिक रहता था ,
CH -22 बाबा खाने से पहले अल फातिहा जरुर पढ़ते थे ,
CH -22, बाबा रोज कुरान पढ़ते थे ,
CH -23 बाबा ने न खुद कभी उपवास किया न किसी को करने दिया ,
Ch-38 बाबा प्रसाद में मीठ(मांस) मिला कर देते थे , ch-38, मीठ राइस उनका सबसे प्रिय भोजन था।  Ch-23, बाबा ने कहा मैं तो यावनी (मुसलमान) हूँ

Ch- 28,शिरडी पहुँचने पर जब वह मस्जिद मेँ घुसा तो बाबा अत्यन्त क्रोधित हो गये और उसे उन्होने मस्जिद मेँ आने की मनाही कर दी। वे गर्जन कर कहने लगे कि इसे बाहर निकाल दो। फिर मेधा की ओर देखकर कहने लगे कि तुम तो एक उच्च कुलीन ब्राह्मण हो और मैँ निम्न जाति का यवन (मुसलमान)। तुम्हारी जाति भ्रष्ट हो जायेगी। 

गंगाजल का अपमान :-
Ch-32 मुझे इस झंझट से दूर ही रहने दो। मैँ तो एक फकीर(मुस्लिम, हिन्दू साधू कहे जाते हैँ फकीर नहीँ) हूँ।मुझे गंगाजल से क्या प्रायोजन? 

मांसाहारी साँई बाबा :-
CH- 23 मस्जिद मेँ एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया। वह अत्यन्त दुर्बल और मरने वाला था। बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा।
CH- 23तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैँ स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करूँगा। CH-5 & 7 फकीरोँ के साथ वो आमिष(मांस) और मछली का सेवन करते थे।

CH-38 कभी वे मीठे चावल बनाते और कभी मांसमिश्रित चावल अर्थात् नमकीन पुलाव। 
CH32 - एक एकादशी के दिन उन्होँने दादा कलेकर को कुछ रूपये माँस खरीद लाने को दिये। दादा पूरे कर्मकाण्डी थे और प्रायः सभी नियमोँ का जीवन मेँ पालन किया करते थे। 
CH-38 ऐसे ही एक अवसर पर उन्होने दादा से कहा कि देखो तो नमकीन पुलाव कैसा पका है? दादा ने योँ ही मुँहदेखी कह दिया किअच्छा है। तब बाबा कहने लगे कि तुमने न अपनी आँखोँ से ही देखा है और न ही जिह्वा से स्वाद लिया, फिर तुमने यह कैसे कह दिया कि उत्तम बना है? थोड़ा ढक्कन हटाकर तो देखो। बाबा ने दादा की बाँह पकड़ी और बलपूर्वक बर्तन मेँ डालकर बोले -”अपना कट्टरपन छोड़ो और थोड़ा चखकर देखो”
जिन भाइयो को भरोषा नही है साई सचरित के इस लिंक पर जा कर सत्यापन करे
Truth of Sai in Sai Charitra

साईं  से सिद्ध होता है की साईं बाबा एक मुसिलम थे और मांसहारी भी थे फिर साई कि पूजा क्यों अगर पूजा ही करनी है तो सनातन देवी देवताओ कि करो जब भगवान कृष्ण ने गीता में खुद कहा है

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥२- ४७॥
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो

और गौस्वामी तुलसी दास जी भी लिखते है कर्म प्रधान विस्व करी रखा जो जस करई सो तस फल चाखा जब कर्म ही प्रधान है तो फिर सांसारिक वासनाओ के लिए साई कि पूजा क्यों क्या कोई बुध्धिजीवी मुझे जबाब दे सकता है

जैसा की हम सब देख रहे है कि  गत कुछ दशकों से मजारों को मंदिरों की भांति महिमामंडित करने का जोरदार अभियान देश में चल रहा है।  इनके उर्सों पे प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक भाग ले रहे हैं। इनको धार्मिक भेदभाव से

ऊपर सच्चा मानवतावादी बताया जा रहा है। हालांकि इनकी दरगाहों पे जाने वाले 80% पथभ्रष्ट हिन्दू ही
होते हैं। आज आपको ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में बताते हैं। सिरत अल क़ुतुब के अनुसार इसने 7 लाख हिन्दुवों को अपने जीवनकाल में मुस्लमान बनाया था। मजलिस सूफिया नामक ग्रंथ के अनुसार जब वह मक्का हज करने गया तो उसे ये निर्देश दिया गया की वो हिंदुस्तान जाये और वहां पर कुफ्र के अंधकार को दूर करके वहां इस्लाम का राज स्थापित करे।
मारकत इसरार नमक ग्रंथ के अनुसार इसने तीसरी शादी एक हिन्दू लड़की को जनरन धर्मान्तरित करके
की थी वो बेचारी बेबस किशोरी एक हिन्दू राजा की पुत्री थी जिसे वह उसके पिता को हराकर
जबरन उठा लाया था। इस बेचारी का नाम चिश्ती ने उम्मत अल्लाह रखा इससे हुयी पुत्री का नाम
हफिजा जमाल रखा जिसकी मजार चिश्ती की ही दरगाह में मौजूद है।

तारिख ए औलिया के मुताबिक ख्वाजा ने अजमेर नरेश पृथ्वीराज चौहान को मुस्लमान बनने की
दावत दी। चौहान के इंकार करने पर ख्वाजा ने कहा ये इस्लाम पर इमान नहीं लाता मैं इसे लश्करे
इस्लाम के हवाले जिंदा गिरफ्तार करवा दूंगा। चिश्ती ने मोहम्मद गौरी को भारत पे आक्रमण करने
को बुलाया। 

पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार गौरी को युद्ध में हराया और हर बार गौरी कुरान की कसम खा के पैरों में पड़ जाता और पृथ्वी उसे क्षमा कर देते पर 17वें युद्ध में वो जयचंद की गद्दारी के कारन पृथ्वी पराजित हुए। गौरी उन्हें बंदी बना ले गया।

हलाकि हिंदू गौरव पृथ्वी ने गौरी को अपने शब्दभेदी बाण से मार गिराया। पृथ्वी के बाद चिश्ती ने अजमेर के सारे
मंदिर तुड़वा दिए और उनके मलबे से एक मस्जिद बनवाई जिसका नाम है ढाई दिन का झोपड़ा।

सवाल ये है की यदि चिश्ती वाकई सब धर्मों को एक मानता था तो उसने 7 लाख हिंदुओं को जबरन
मुसलमान क्यों बनाया...?
क्या ये मानवता है की एक किशोरी का जबरन धर्मपरिवर्तन करा के उससे बलात निकाह
किया जाये...?

उसने गौरी को हिन्दू मंदिरों को तोड़ने को क्यों प्रेरित किया...? ये प्रश्न ऐसे हैं जिस पे हमे गंभीरता से
विचार करने योग्य है । क्या अब भी  ऐसी दरगाह पे जाना चाहेंगे आप ..?
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