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मऊ : उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के मद्देनजर पुलिस ब्रीफिंग में एक पुलिस अधिकारी द्वारा मोदी के काफिले पर हमले की आशंका जाहिर किये जाने की खबर से सनसनी फैल गयी. हालांकि राज्य के पुलिस उपमहानिदेशक ने ऐसी कोई खुफिया खबर होने से इनकार किया है.
DBT: मोदी के काफिले पर हमले की आशंका

प्रधानमंत्री की मऊ के भुजौटी ऑफिसर्स कॉलोनी के सामने रैली होनी है. इस कार्यक्रम को लेकर आज हुई पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक रविन्द बहादुर सिंह ने कहा कि ऐसी सूचना मिली है कि प्रधानमंत्री के काफिले पर राकेट लांचर से हमला हो सकता है.

सिंह ने कहा, ‘‘प्राप्त सूचनाओं के अनुसार प्रधानमंत्री जी को गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के मामले में फरार अभियुक्तों से भी खतरा है. रसूलपती और उसके दो सहयोगी जो पाकिस्तान में बैठे हैं, वे प्रधानमंत्री के काफिले पर रॉकेट लांचर से अथवा विस्फोटक से भरे वाहन से हमला करने की योजना बना रहे हैं, ऐसा इनपुट आया है.' 

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिये सुरक्षा व्यवस्था ऐसी जगह पर महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां से राकेट लांचर का प्रयोग किया जा सकता है तथा अन्य वाहन जो काफिले की गाडियों के आसपास चल रहे हों.' सिंह ने यह भी कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर जो सूचनाएं हैं, उनके दृष्टिगत निरन्तर सूचना संकलन कराया जा रहा है किन्तु इस सम्बन्ध में कोई उल्लेखनीय तथ्य प्रकाश में नहीं आया है.' दूसरी ओर, प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी ने बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री के काफिले पर हमले की आशंका की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई.

उन्होंने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक ने जो भी कहा है, वह रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किये गये पुलिसकर्मियों को हर तरह के खतरों से आगाह करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है.

भारत में निर्मित एक लड़ाकू विमान, जो लगभग हर वायुसेना प्रमुख का पसंदीदा विषय रहा है, उसके निर्माण में इतनी अधिक देरी हो गई कि ऐसा लगने लगा कि यह एक ऐसा वादा है जो कभी पूरा नहीं हो पाएगा। हालांकि 'तेजस' नाम के इस लाइट कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट का विकास शुरू होने के करीब तीन दशक बाद अब बेंगलुरु में शुक्रवार को भारतीय वायुसेना में आधिकारिक रूप से शामिल हो गया। तेजस कई मायनों में विश्‍वस्‍तरीय है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि लाइट कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम में हुई देरी को जायज नहीं ठहराया जा सकता। इसके कारणों को लेकर कई बार गर्मागर्म बहस भी हो चुकी है। इस बारे में तेजस कार्यक्रम में मुख्‍य भूमिका निभाने वाली सरकारी कंपनी हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) का कहना है कि भारतीय वायुसेना का लक्ष्य बदलता रहा कि तेजस में वास्तव में उसे क्या चाहिए। कंपनी ने यह भी बताया कि पोखरण परमाणु परीक्षण, 1998 के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी तेजस कार्यक्रम पर बहुत बुरा असर पड़ा और इसके लिए अतिमहत्वपूर्ण तकनीक हासिल नहीं की जा सकी।
जहां तक वायुसेना की बात है तो वह इस बात पर जोर देती रही कि विश्‍व बाजार में इससे बेहतर विकल्‍प मौजूद हैं और ऐसी कंपनियां मौजूद हैं जो मिलिट्री एविएशन में दशकों से काम कर रही हैं। तेजस के बारे में वह कहती रही कि जब तक यह वायुसेना में शामिल होगा तब तक यह पुराना हो चुका होगा।
हालांकि ऐसा नहीं हुआ। कम से कम अभी तक तो नहीं।

इजराइल में बने मल्‍टीरोल रडार एल्‍टा 2032, दुश्‍मन के विमानों पर हमला करने के लिए हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलें और जमीन पर स्थित निशाने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्‍नेटर और टारगेटिंग पॉड्स से लैस तेजस क्षमता के मामले में कई मायनों में फ्रांस में निर्मित मिराज 2000 के जैसा है, जिसे हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने इस कार्यक्रम के लिए बेंचमार्क माना था।
विमान का परीक्षण करने वाला प्रत्‍येक पायलट तेजस के फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम से संतुष्‍ट है, चाहे कलाबाजी में इसकी कुशलता हो या फिर इसके फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम की रिस्‍पॉन्‍सिवनेस। तेजस की परीक्षण उड़ानों के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना में किसी भी पायलट को कभी कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। अब तक इसकी 3000 से ज्‍यादा उड़ानें सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं।
इन तथ्‍यों के बावजूद आलोचकों का कहना है कि तेजस पूरी तरह स्‍वदेशी नहीं है। उनका कहना है कि इसका इंजन अमेरिकन है, रडार और हथियार प्रणाली इजराइली हैं, इसकी इजेक्‍शन सीट ब्रिटिश है, साथ ही इसके कई अन्‍य कलपुर्जे भी आयातित हैं। हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स का कहना है कि फ्रांस के रफाल और स्‍वीडन के ग्रिपन जैसे विमानों में भी विदेशी सिस्‍टम लगे हैं क्‍योंकि इतनी कड़ी प्रतिस्‍पर्धा के बीच कलपुर्जों का विकास करना बहुत ही महंगा और बहुत ही ज्‍यादा समय लेने वाला होता है।
तो क्‍या तेजस कार्यक्रम ने भारत के इंजीनियरिंग और विज्ञान के क्षेत्र में कोई योगदान दिया है? वास्‍तव में दिया है। तेजस में लगा फ्लाइ-बाइ-वायर सिस्‍टम जो विमान को नियंत्रित करने के लिए कंप्‍यूटर नियंत्रित इनपुट देता है, वह पूरी तरह भारतीय है। विमान में लगा मिशन कंप्‍यूटर, जो सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करता है, वह भी पूरी तरह भारतीय है। मिशन कंप्‍यूटर का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ओपन आर्किटेक्‍चर फ्रेमवर्क को ध्‍यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि इसे भविष्‍य में अपग्रेड किया जा सकता है।
विमान का ढांचा भी भारत में बने कार्बन फाइबर, जो कि धातु की तुलना में कहीं ज्‍यादा हल्‍का और मजबूत होता है, से बना है। यहां तक कि विमान में लगे सामान्‍य सिस्‍टम जिसमें ईंधन प्रबंधन से लेकर स्‍टीयरिंग तक, सब भारत में ही निर्मित हैं। एक महत्‍वपूर्ण सेंसर तरंग रडार, जो कि दुश्‍मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है, भारत में ही बना है।
आधुनिक लड़ाकू विमान, जिसमें भारतीय वायुसेना का सर्वश्रेष्‍ठ विमान सुखोई 30 भी शामिल है, अपने महंगे रखरखाव के लिए कुख्‍यात हैं। सुखोई 30 की फ्लीट में 60 फीसदी से भी कम विमान एक वक्‍त पर मिशन के लिए उपलब्‍ध होते हैं, जो कि भारतीय वायुसेना के लिए चिंता का विषय है। एचएएल का कहना है कि तेजस 70 फीसदी से ज्‍यादा समय के लिए उपलब्‍ध होगा, जब भी मिशन पर जाने की जरूरत होगी और 80 फीसदी के लिए भी प्रयास जारी हैं। यह वर्तमान में वायुसेना के किसी भी विमान द्वारा हासिल किए जाने वाले लक्ष्‍य से कहीं ज्‍यादा है।
शुक्रवार को, जब भारतीय वायुसेना की 45वीं स्‍क्‍वाड्रन, 'फ्लाइंग डैगर्स' के रूप में तेजस को शामिल किया जाएगा तो तेजस कार्यक्रम के एक नए अध्‍याय की शुरुआत होगी। एक दशक से भी पहले की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया विमान तेजस कभी भी दुनिया के सर्वश्रेष्‍ठ लड़ाकू विमानों में शुमार नहीं होगा। हालांकि यह भारतीय वायुसेना को मिग 21 का विकल्‍प उपलब्‍ध कराएगा, जो वह चाहती थी। तेजस के रूप में भारतीय वायुसेना के पास एक आधुनिक लड़ाकू विमान है जो आधुनिकीकरण और क्षमताओं में विस्‍तार के साथ और बेहतर होता जाएगा। फिलहाल, यह भारतीय वायुसेना में इस नए अध्‍याय के शुरू होने के जश्‍न का समय है।


15 मई 2016 , नई दिल्ली । हिन्दू धर्मीय गाय को पूज्य मानते हैं, माता मानते हैं । तब भी गोदरेज समूह के अध्यक्ष अदी गोदरेज ने  गोमांसभक्षण का समर्थन करते हुए निष्कारण अंग्रेजों की दास बनी अपनी बुद्धि दिखाकर कहा है कि ‘वैदिक काल में भारतीय गोमांस खाते थे । हिन्दू धर्म में बीफ का कहीं भी विरोध नहीं है ।’ वेदों में अनेक स्थानों पर  गोमांसभक्षण की केवल निंदा ही नहीं की गई है, अपितु गोहत्या करनेवालों को कठोर दंड बताया है । गोदरेज पारसी समाज के हैं । पारसी धर्मग्रंथ ‘अवेस्ता’ के ‘यस्न, ३८.८’ की दूसरी पंक्ति में ‘गाय, बैल, तथा बछडे के मांस का भक्षण वर्ज्य कहा गया है । इसलिए केवल व्यवसायिक दृष्टीकोण सामने रखकर जानबूझकर करोडों हिन्दुआें के श्रद्धास्थान गोमाता के विषय में अपमानजनक वक्तव्य कर हिन्दुआें की धार्मिक भावनाएं आहत की हैं । इसलिए अदी गोदरेज पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए तथा हिन्दू मन्दिरों के गर्भगृह में स्त्रियों को प्रवेश देने के विषय में शासन तथा न्यायालय परस्पर धर्मपरंपरा भंग न करते हुए हिन्दू धर्म के शंकराचार्य अथवा काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में यह निर्णय लें । ये मांगे करते हुए सुबह १० से दोपहर १२ बजे दिल्ली के जंतर मंतर पर  ‘राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन’ किया गया , जिसमें सनातन संस्था, वैदिक उपासना पीठ, योग वेदांत सेवा समिति और हिंदू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता सम्मिलित हुए ।

     गोदरेज केवल मद्य-मांसविक्री करनेवाले उद्योगपतियों की टंकियां भरने के लिए ही इस प्रकार का विधान कर रहे हैं । देश के उद्योगों की चिंता करनेवाले गोदरेज नेे देश को धोखा देकर ९ सहस्र करोड रुपए लूटनेवाले मद्यसम्राट विजय मल्ल्या के विषय में मुंह क्यों बंद रखा है ? गोहत्या के कारण हिन्दू संस्कृति का नाश हो रहा है । गोदरेज को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि देश के आर्थिक विकास सहित हिन्दू संस्कृति की रक्षा और संवर्धन होना भी आवश्यक है । इसलिए हिन्दुआें की भावनाआें का आदर कर गोदरेज को हिन्दुआें की सार्वजनिक क्षमा मांगनी चाहिए अन्यथा हिन्दू गोदरेज समूह के सभी उत्पादनों का बहिष्कार करें, ऐसा आवाहन भी इस समय हिन्दुत्वनिष्ठों ने किया ।

* इस समय की गई अन्य मांगें ....

. देहली विश्‍वविद्यालय की पाठ्यपुस्तक में हुतात्मा भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, सूर्यसेन आदि क्रांतिकारियों को ‘आतंकवादी’ सिद्ध करनेवाले सर्व संबंधितों पर राष्ट्रपुरुषों का घोर अपमान करने के लिए अपराध प्रविष्ट करें ।

. ‘भूमाता ब्रिगेड’ जैसे धर्मविरोधी संगठनों के मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने हेतु धर्मविरोधी आंदोलन कर रहे हैं । ये आंदोलन राजनैतिक अवसरवादिता और प्रसिद्ध होने की लालसा के लिए किए जा रहे हैं । इसलिए ऐसे  प्रसिद्धीलोलुप आंदोलन कर सामाजिक शांति भंग करनेवाले पुरोगामियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए ।
     
                                                     
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