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आतंकवाद से लेकर धार्मिक आजादी जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान दुनियाभर में बेनकाब होता जा रहा है. अब अमेरिका ने खुले तौर पर कहा है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आजादी खतरे में है.

अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक आजादी को संरक्षण नहीं दिया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में सिख, ईसाई और हिंदू जैसे अल्पसंख्यक जबरन धर्मांतरण के डर में रहते हैं.

इसके अलावा पाकिस्तान में हुक्मरानों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं. कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर हिंदू, सिख और ईसाइयों की आजादी सुनिश्चित करने वालों कानूनों पर सही ढंग से अमल नहीं किया जा रहा है.

'धर्मांतरण रोकने में सरकार फेल'

रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार को सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. रिपोर्ट में पाकिस्तान में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों का हवाला देते हुए बताया गया ''धार्मिक अल्पसंख्यकों की शिकायत है कि वे धर्मांतरण की समस्या को सुलझाने के लिए सरकार के अपर्याप्त कदमों को लेकर चिंतित रहते हैं.''


बता दें कि पाकिस्तान से अक्सर हिंदूओं पर हमले की खबरें आती रहती हैं. इसके अलावा हिंदू, सिख और ईसाइयों के जबरन धर्मांतरण की भी तमाम खबरें सामने आती रहती हैं. कई बार पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

टिलरसन ने सुषमा को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई

वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने अपनी समकक्ष सुषमा स्वराज को फोन कर स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी. इस दौरान दोनों के बीच विदेश और रक्षा संबंधों में व्यापक तालमेल को लेकर भी बातचीत हुई.

Pawan Pandit, president of the Bhartiya Gau Raksha Dal (BGRD) and resident of Bhiwani, Haryana, described the government’s latest effort as “a way to take some credit, a way to stay in the timeline”. Pandit said that gau rakshaks had to take matters in their hands because the authorities had failed to check violations of the law, saying that “if the government did its job well, civil society need not be involved”.
Cow vigilantism, it turns out, actually has a method to it. Established in 2012, Pandit describes BGRD as “something like a federation”, which comprises of district and state level units affiliated to the apex body, headquartered in Delhi. In the four years since its inception, Pandit feels that BGRD’s efforts have ensured that “people are getting aware” of the importance of cow protection.
But there is a downside to BGRD’s work as well. Pandit said that since gau rakshaks had started going after smugglers, incidents of violence had gone up. “When things were going on smoothly, they [cattle smugglers] were getting away with it easily. But they don’t want to stop their work, so now they come well-armed. Now they’re always ready to fire,” Pandit said.
Over-zealous gau rakshaks have been on the receiving end of attacks by cattle smugglers. Just last week, a member of the Gurgaon Gau Raksha Dal was shot at while attempting to stop a vehicle transporting cattle, and sustained bullet injuries on his fingers. Under the circumstances, Naveen Sharma, general secretary of BGRD, who is based in Himachal Pradesh, agreed that “it’s best if the police does its work”. However, he believes vigilantism is inevitable because of the sacredness of the cow.
Agar aapki behen-beti ka balaatkar ho jaata haitab aap kya karoge [If you daughter or sister gets raped, what will you do then]?” he asked. “And we consider the cow our mother!”
Pandit feels that going after cattle smugglers is important, even though he conceded the point that the people cow vigilantes grab are “mostly rented or hired people”. It still serves a purpose, according to him. “When they [smugglers] know that there is danger out there, that there are people on the lookout and they can’t cross the line, then their masters won’t get new recruits,” Pandit said.
Undoubtedly, Arora is bound to have her hands full with the vigilantes unlikely to back down. She said her officers would receive special training in order to prevent situations where the public takes the law into their hands, thus promoting vigilantism. “Lots of times law and order situations are created when we are not able to catch cow smugglers and the public catches them,” she said. “So we need to train our policemen about the Act. The modus operandi we adopt, the rules we follow, all these things will be shared with our policemen and they will be encouraged to catch such people more and more.”
It is doubtful that the gau rakshaks will be impressed with Arora’s efforts, despite her professed intention of working with them rather than against them. Even after passing a strict cow protection bill and having a dedicated cow protection unit, cow vigilantes have only distrust for the government. What is likely is that regardless of Arora’s cow protection unit, these groups will be out on the streets, setting up barriers, chasing vehicles, beating up smugglers and occasionally taking bullets, all for the love of gau mata.
(source: http://www.newslaundry.com/)

अक्सर भारतीय मुस्लमान स्वयं  को हिन्दू की संतान कहलाने से बचता है  तथा स्वयं  को अरबी मुस्लमान बताता है, जबकि अरब में भारतीय और पाकिस्तानी मुसलमानो को दोयम दर्जे का मुसलमान माना जाता है।  
चूँकि ये सभी हिन्दुओ की संताने थी जो जान बचाने के डर से मुसलमान बन गए  और अब ये देखें इस्लामिक देश पाकिस्तान के मीडिया में बड़े गर्व से स्वीकारा जा रहा है की "हमारे पास तो 600 साल से पूर्वज का  हिसाब है और हम तो केवल 200 साल पहले मुस्लमान बने है"  
आपको बता दें की पूरी दुनिया जानती है की बर्बर हमलावरों ने हमला कर हिन्दुओ का धर्मांतरण किया, जो केयर हिन्दू थे उन्होंने धर्मांतरण कर लिया और उन्ही की संताने आज भारत और पाकिस्तान में मुस्लमान के रूप में है   जो बहादुर हिन्दू थे उनकी संताने आज भी हिन्दू के रूप में मौजूद है 



देखिए  वीडियो आपको  यकीं हो जाएगा  नहीं था तो--- 

धर्म ग्रंथों के अनुसार, मनुष्य की मृत्यु के बाद यमदूत उसकी आत्मा को यमराज के पास ले जाते हैं। यहां यमराज उसके कर्मों के अनुसार उसे स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। नरक में उस व्यक्ति की आत्मा को क्या सजा दी जाएगी, ये भी यमराज ही तय करते हैं। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि यमराज को भी एक ऋषि के श्राप के कारण धरती पर मनुष्य के रूप में जन्म लेना पड़ा था। युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के अंतिम दौर में पूरी स्त्री जाति को एक श्राप दिया था।
क्या था वो श्राप और कुछ ऐसे ही अनोखे श्रापों के बारे में आज आपको बता रहे हैं, जिनके बारे में लोग कम ही जानते हैं-
माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप
महाभारत के अनुसार, माण्डव्य नाम के एक ऋषि थे। राजा ने भूलवश उन्हें चोरी का दोषी मानकर सूली पर चढ़ाने की सजा दी। सूली पर कुछ दिनों तक चढ़े रहने के बाद भी जब उनके प्राण नहीं निकले, तो राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने ऋषि माण्डव्य से क्षमा मांगकर उन्हें छोड़ दिया। तब ऋषि यमराज के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि मैंने अपने जीवन में ऐसा कौन-सा अपराध किया था कि मुझे इस प्रकार झूठे आरोप की सजा मिली।
तब यमराज ने बताया कि जब आप 12  वर्ष के थे, तब आपने एक फतींगे की पूंछ में सींक चुभाई थी, उसी के फलस्वरूप आपको यह कष्ट सहना पड़ा। तब ऋषि माण्डव्य ने यमराज से कहा कि 12 वर्ष की उम्र में किसी को भी धर्म-अधर्म का ज्ञान नहीं होता। तुमने छोटे अपराध का बड़ा दण्ड दिया है। इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम्हें शुद्र योनि में एक दासी पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ेगा। ऋषि माण्डव्य के इसी श्राप के कारण यमराज ने महात्मा विदुर के रूप में जन्म लिया।
आगे की स्लाइड्स में जानिए श्रापों से संबंधित कुछ अन्य प्रसंग!!
1. 
युधिष्ठिर ने क्यों दिया स्त्री जाति को श्राप?
2.  स्त्री मिलन के कारण क्यों हुई राजा पांडु की मृत्यु?
3.  नागमाता ने क्यों दिया अपने पुत्रों को श्राप?
4.  किसके श्राप से नपुंसक बने अर्जुन?
5.  श्राप के कारण आज भी भटक रहा है ये महावीर?
6.   इस श्राप के कारण हुई राजा परीक्षित की मृत्यु?
7.   गुरु परशुराम ने ही दिया था कर्ण को श्राप, क्यों?
8.   गांधारी ने क्यों दिया श्रीकृष्ण को श्राप?
9.   दक्ष ने क्यों दिया चंद्रमा को श्राप?
10. श्रीगणेश को किसने दिया था श्राप?
11. नारद ने क्यों दिया भगवान विष्णु को श्राप?
12. किस श्राप के कारण वसुओं को लेना पड़ा धरती पर जन्म?
13. इस श्राप के कारण हुआ श्रीकृष्ण के परिवार का अंत?
14. शुक्राचार्य ने क्यों दिया अपने जमाई को श्राप?
15. ये श्राप बना राजा दशरथ की मृत्यु का कारण?
16. तुलसी ने क्यों दिया भगवान विष्णु को श्राप?
युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप
महाभारत के शांति पर्व के अनुसार, युद्ध समाप्त होने के बाद जब कुंती ने युधिष्ठिर को बताया कि कर्ण तुम्हारा बड़ा भाई था तो पांडवों को बहुत दुख हुआ। तब युधिष्ठिर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का भी अंतिम संस्कार किया। माता कुंती ने जब पांडवों को कर्ण के जन्म का रहस्य बताया तो शोक में आकर युधिष्ठिर ने संपूर्ण स्त्री जाति को श्राप दिया कि- आज से कोई भी स्त्री गुप्त बात छिपा कर नहीं रख सकेगी।

 हमारा देश भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ हिन्दू धर्म को मानने वालो की संख्या सबसे अधिक है  फिर भी उनके ऊपर  अपने अस्तित्व को बचाने का खतरा बना हुआ है | दोष वोट बैंक करने वाले नेताओं, तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के पुजारियों और बिकी हुई मीडिया का है जो हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर तो खामोश रहते हैं और  अल्पसंख्यकों पर होने वाली छोटी से छोटी घटना को बढ़ा चढ़ा कर जनता के सामने लाते हैं | अगर ऐसा ही चलता रहा तो ऐसा लगता है सच में इस प्रचीन धर्म का अस्तित्व ही नहीं रहेगा।  हिन्दू धर्म के प्रचार प्रसार को “भगवाकरण” से जोड़ने वालों के लिए हम यह लिख रहे है सभी धर्मों में सबसे प्राचीन हिन्दू धर्म है इस धर्म  को दुनिया के बड़े देशों जैसे, अमरीका, रूस, इजराइल, आस्ट्रेलिया, जर्मनी और कई यूरोपीय देशों में काफी पसंद किया जा रहा है | ईसाई और यहूदी धर्म के लोग भी  हिन्दू धर्म की वैज्ञानिकता से बहुत  ज्यादा प्रभावित हैं | इनका यह  मानना है कि हिन्दू धर्म वास्तव में आत्मा के परमात्मा से मिलन का अद्वितीय जरिया है | पर दुःख की बात तो यह है की अपने ही देश में हिन्दुओ को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़  रहा है अपने ही लोग इसके अस्तित्व को खत्म करने पर लगे हुए है हिन्दू धर्म के सभ्यताओं और संस्कृतियों को छोड़ रहे है  किसी के बहकावे में आकर यह अपने ही अपनों का साथ नहीं दे रहे है सबसे बड़ा कारण यह भी है की हमारे साथ हो रहे अन्यायों को हमारे अपने लोग हिन्दू धर्म के होने के बावजूद भी अनदेखा क्र देते है और दूसरे धर्मो के लिए आवाज उठते है उनकी छोटी सी परेशानी को देश में बड़ा बन क्र पेश कर रहा है खास कर आधुनिक मीडिया वाले। मेरे मन में सवाल आता है क्या आधुनिकता का मतलब किसी के अधिकारों या अस्तित्व का हनन करना है ? तो थु है ऐसी आधुनिकता पर जो अपने मतलब के लिए किसी के अस्तित्व को मिटाने पर लगे हुए है और किसी के साथ अन्याय होते  हुए देख कर भी चुप रहते है उनका साथ नहीं देते।


 एक समय फासीवाद की विचारधारा से प्रभावित जर्मनी ने सनातन धर्म की महत्ता काफी पहले ही समझ ली थी | दुनिया के दूसरे देश में आज उसी पथ पर अग्रसर हैं | पर इन सबसे बढ़कर यदि किसी ने प्रभाव डाला है तो वह हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी
 हैं जिन्होंने योग दिवस को एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाकर पूरी दुनिया  में स्थापित किया | आज योग के माध्यम से अमरीका जैसा बड़ा और शक्तिशाली देश भी भारतीय हिन्दू धर्म को अपना रहा है | योग के अलावा गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, ओमकार आदि का पूरी दुनिया में जाप हो रहा है | दुनिया भर में स्थित लाखों योग केंद्रों पर विदेशी एकत्रित होते हैं और योग के साथ साथ हिन्दू धर्म की पूजा पद्धति को सीखते हैं | चाहे वह ओबामा जैसे बड़े राजनेता हों या जूलिया रॉबर्ट्स जैसी मशहूर फिल्म अभिनेत्री, हर कोई हिन्दू धर्म से पूरी तरह प्रभावित मालूम पड़ता है |
सबसे अहम और बड़ी  बात यह है कि पहले हिन्दू धर्म को जो दूसरे धर्म के  लोग चोरी चुपके मानते थे वही  दूसरे धर्मों के लोग आज इस सनातन धर्म के समर्थन में खुलकर आ रहे हैं | जो की बड़े हर्ष की बात है। हिन्दू धर्म की पूजा पद्धति को अंधविश्वास बताने वाले ईसाई और यहूदी भी आज  इसी पूजा पद्धति को धारण कर रहे हैं | हॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं से लेकर भारत आने वाले सैलानियों के हाँथ पर रक्षासूत्र अथवा कलेवा देखा जा सकता है | हिन्दू धर्म के मुंडन संस्कार, विवाह, श्राद्ध संस्कार आदि का दूसरे धर्म को मानने वाले विदेशियों के जीवन में भी  कई उदहारण देखे जा सकते हैं | हमारे हिन्दू धर्म में कुम्भ स्नान की परंपरा है जिसमें बहुत सारे विदेशी और दूसरे धर्मो के लोग भी आज देखने को मिल सकते है जो हिन्दू धर्म के कार्यो और परम्पराओ में विश्वाश और आस्था रखते है।  दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेटर जोंटी रोड्स ने अपनी बेटी, जिसका नाम उन्होंने “इंडिया” रखा है, और अपने बेटी  के जन्म दिन पर भारत आकर मंदिर में हवन किया | इसके अलावा और भी ऐसे काफी उदहारण हैं जो हिन्दू धर्म की विश्वभर में प्रसिद्धि को बताते हैं |

हमारे देश भारत में  हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान  शिव वो देव हैं जिन्हें देव की उपाधि भी मिली और साधू सा वैराग्य भी. इस संसार को चलाने वाले अगर विष्णु कहे जाते हैं तो शिव संसार को बैलेंस करते हैं.शिव वो है जो संसार की बुराई से जूझता है, शिव वो है जो जीवन की कठिनाइयों के विष को अमृत समझ कर पी जाता है, शिव वो है जो ‘नीलकंठ’ कहलाता है.

वो मद मस्त है, वो चिंता न कर भी चिंतन कर पाता है, वो निश्छल है, निष्कपट है, तभी तो ‘
बम भोले’ कहलाता है.दुनिया भर में जितने भी शिव भक्त हैं, आपने उन्हें शिव का नाम लेते हुए, ‘भांग’ का सेवन करते हुए देखा और सुना होगा. कई लोग ये तर्क देते हैं, कि शिव भी भांग पीते थे, इसलिए हम भी उनकी तरह बनेंगे, भांग पिएंगे.

भांग पुराने समय से यूज़ की जा रही एक ऐसी ड्रिंक है, जिसे हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ‘भगवान के अमृत’ की उपाधि हासिल है. भांग से कई बीमारियों का इलाज संभव है और ये गंभीर चोटों को ठीक करने में सक्षम है. वेदों में भांग को एक ‘Medicinal Plant’ बताया गया है, जो ‘5 पवित्र पौधों में से एक है’.

एक व्यक्ति ने इसका बड़ा अच्छा उदाहरण दिया है कि:जिस तरह सूर्य बिना दूषित हुए मूत्र में से भी पानी खींच लेता है, उसी तरह शिव भी बिना रुके विष के सागर को अपने अंदर समा सकते हैं.वो इतने शक्तिशाली हैं कि भांग या चिलम पी सकते हैं, लेकिन अपना होश कभी नहीं खोएंगे.

कई अघोरी चिलम भांग का सेवन करते हैं, क्योंकि ये माना जाता है कि इससे दिमाग को केंद्रित करने और ध्यानमग्न होने में सहायता मिलती है. हर योगी शिव जैसा बनना चाहता है, लेकिन शिव परम योगी हैं. सवाल ये उठता है कि शिव भांग क्यों पीते थे या इसके पीछे क्या कारण रहा है:

देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन से जो विष निकला, उससे पृथ्वी पर हाहाकार मच गया, इस विष को पीने वाले शिव थे. लेकिन उन्होंने विष को निगला नहीं, बल्कि उसे कंठ में रख दिया, इसलिए वो नीलकंठ कहलाये. ये विष इतना गर्म था कि इससे शिव को बहुत गर्मी हो गयी और फिर उन्हें कैलाश भेजा गया, जहां तापमान हमेशा 0 डिग्री रहता है. शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाने का महत्व भी इसलिए है क्योंकि ये ठंडा होता है. ऐसा ही कुछ भांग या चिलम के बारे में भी कहा जाता है. साइंस के नज़रिये से देखने पर आपको ये पता चलेगा कि भांग ‘Coolant’ का काम करता है.

वेदों के अनुसार समुद्र मंथन से एक बूंद मद्र पर्वत पर गिरने से एक पौधा उगा. इस पौधे का रस देवताओं को इतना पसंद आया कि उन्होंने इसका सेवन करना शुरू कर दिया. और बाद में शिव इसे हिमालय में ले आये ताकि हर कोई इसका सेवन कर सके.

भांग को गंगा की बहन कहा जाता है और ये हमेशा गंगा के किनारे ही उगती है. इसीलिए भांग को शिव की जटा पर बसी गंगा के बगल में जगह मिली है.

कहा जाता है कि देवता हमेशा सोमरस का सेवन करते थे और इसी को पाने के लिए असुरों ने उनसे लड़ाई की थी. ये माना जाता है कि सोमरस और भांग दोनों एक ही हैं. हालांकि इस बात की अभी कोई पुष्टि नहीं की गयी है

शिव हमेशा ध्यान में रहते थे, और भांग ध्यान केंद्रित करने के लिए जानी जाती है. इससे वो हमेशा परमानंद में रहते थे और कभी भी ध्यान लगा सकते थे. यही कारण है की कई योगी, अघोरी और साधू चिलम और भांग पीते हैं, ताकि वो भी और अच्छे से ध्यान लगा सकें.

ये सब वो बाते  थीं, जो शिव के भांग पीने से  जुड़ी हैं. इनकी प्रमाणिकता के बारे में किसी को भी ढंग से नहीं पता, लेकिन भगवान  शिव के भांग पीने से ज़्यादा ज़रूरी उनके जीवन को समझना है. भांग उनके जीवन का पहलू कही जा सकती है. भगवान शिव  अभी और भी चमत्कारी बातें  है जिनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी की आवश्यकता है 


 गाय का काफी महत्व है पूरी दुनिया में  लेकिन भारत में गाय का महत्व सदियों से है प्राचीन काल से गाय को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना गया है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है। 
उपयोगिता :
वही अगर बात करे गाय के दूध की तो यह बहुत ही उपयोगी होता है काफी पौष्टिक भी होता है।  बुजुर्गो और बच्चों के लिए गाय के दूध को बेहद उपयोगी माना जाता है इसके अलावा दूध से अनेक प्रकार के पकवान बनता है दूध से दही , पनीर , मक्खन ,और घी भी बनता है, और वाही गाय के गहि और मूत्र की बात करे तो इससे अनेक आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जाती है  , इसके गोबर फसलों किए लिए उत्तम खड़ा में से एक है , यहाँ तक की इसके मरने के बाद उसका चमड़ा , इसकी हड्डिया , व सींग सहित सभी अंग किसी न किसी काम के लिए उपयोग में आते है, अन्य पशुओं की  तुलना मे इसका दूध सबसे अधिक उपयोगी होता है , आज का साइंस भी नहीं ठुकरा सकता इस बात को की गाय का दूध पिने से बच्चों में चंचलता बना रहता है वाही भैंस का दूध पिने से सुस्ती आती है आपने देखा होगा की भैंस का बच्चा दूध पिने के बाद सो जाता है पर गाय का बछड़ा अपनी माँ का दूध पिने के बाद उछल कूद और ज्यादा करने लगता है इससे बड़ा उदाहरण रखने की जरुरत नहीं है हमारे  दैनिक जीवन में गाय के चमड़े, सींग , खुर से अनेक उपयोगी सामान तैयार किया जाता है गाय जीते जी अहम अमृत रूप में दूध तो देती ही है मरने के बाद भी बहुत कुछ दे जाती है। 
भारत में गाय का धार्मिक महत्व :

हमारे देश भारत में गाय को देवी का दर्जा  प्राप्त है। गाय को मात भी कहा गया है और ऐसी मान्यत है की गाय के शारीर में 33 करोड़ देवताओ का निवास है यही कारन है की दीवाली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन गाय के विशेष पूजा का महत्व भी है और उनका मोर के पंखो आदि से की जाती है।  प्राचीन भारत में युद्ध के बाद सोने चंडी , आभूषणो के साथ गाय को भी लुट लिया जाता था क्यों की गाय को समृद्धि का प्रतिक मान जाता था।    भगवान कृष्णा को गाय से बहुत प्रेम है इससे कोई भी अंजान नहीं है इसलिए उनका एक नाम गोपाल भी रखा गया।  

इससे स्पष्ट है कि गाय का हमारे जीवन में कितना महत्व है लेकिन दुर्बग्य की बात है की आज गाय को लोग कट देते है मार देते है जिन्दा जल देते है भूल गए है उसकी महत्व को शहरों में खासकर गायों का असमय मौत हो जाता है इसका कारण है की लोग पॉलीथिन का इस्तेमाल करने के बाद खुले में फेंक देते है जिसे कहकर गाय मर जाती है।  इस पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि हमारी आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों ही बच्ची जा सके ।  


यह भी मान्यता है की गाय की सेवा से परलोक सुधर जाता है  एक गाय की सेवा करने से 108 मंदिरों के निर्माण करने के बराबर फल प्राप्त होता है, गायसृष्टि की जननी है, जिसमें छत्तीस करोड़ देवी देवताओं का निवास होता है। करोड़ों देवी देवताओं की पूजा का फल मात्र एक गाय की सेवा करने से ...

भारत में भगवान विष्णु के अनेको अद्भुत मंदिर है इन्ही अद्भुत मंदिर में से एक है 'राजीवलोचन मंदिर'। यह मंदिर छत्तीसगढ़ में महानदी तट पर स्थित है। महानदी, पैरी तथा सोंढूर नदी का यहाँ संगम होने के कारण छत्तीसगढ़ का यह स्थान त्रिवणी संगम कहलाता है।
इस मंदिर में साक्षात स्वयं भगवान विष्णु रात्रि में विश्राम करने आते है जिसका प्रमाण है मंदिर के अंदर पलंग पर बिछाई गई चादर में आई सलवटे व तेल से भरी कटोरी का खाली मिलना है।
मंदिर के पुजारी हर रोज रात्रि के समय मंदिर के गेट पर ताला लगाने से पहले मंदिर के अंदर भगवान विष्णु के विश्राम के लिए रखी गई पलंग के समाने एक कटोरे में तेल भर कर रखते है।
जब सवेरे मंदिर का गेट खोला जाता है तो पलंग के सामने रखा कटोरा खाली मिलता है तथा पलंग के पर बिछी चादर पर सलवटे पड़ी हुई होती है जिसमे तेल के छोटे छोटे धब्बे दिखाई देते है। जैसे किसी ने रात्रि के समय मंदिर में प्रवेश किया हो, पलंग पर लेटा हो वहां रखे तेल से अपनी मालिश की हो। मंदिर के पुजारी और लोगो का मानना है की स्वयं भगवान विष्णु यहाँ आते है तथा मालिश करते है इसके बाद वे यही शयन करते है।
मंदिर में होने वाले इस चमत्कार की वास्तविकता की जाँच हेतु कई लोगो ने मंदिर के गेट के बाहर पहरा दिया तथा मंदिर के गेट में हर रोज ताले लगाए जाते है परन्तु हर बार सुबह मंदिर में पलंग पर सलवटे देखने को मिलती है साथ ही तेल का भरा कटोरा खाली मिलता 
यहाँ पर भगवान विष्णु राजिव लोचम के नाम से जाने जाते है तथा उनके नाम पर ही इस तीर्थ का नाम राजीव लोचम पड़ा है।

मैं हिन्दु हुँ , हिंदुत्व मेरा धर्म है यह सभी धर्मो से ऊपर है यह आज से नहीं सदियों से मान्य है।  हिन्दुत्व को ही प्राचीन काल में सनातन धर्म कहा जाता था।  इस धर्म के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, दान आदि हैं जिनका शाश्वत महत्त्व है। अन्य प्रमुख धर्मों के उदय के पूर्व इन सिद्धान्तों को प्रतिपादित कर दिया गया था। इस प्रकार हिन्दुत्व सनातन धर्म के रूप में सभी धर्मों का मूलाधार है क्योंकि सभी धर्म-सिद्धान्तों के सार्वभौम आध्यात्मिक सत्य के विभिन्न पहलुओं का इसमें पहले से ही समावेश कर लिया गया था। मान्य ज्ञान जिसे विज्ञान कहा जाता है प्रत्येक वस्तु या विचार का गहन मूल्यांकन कर रहा है और इस प्रक्रिया में अनेक विश्वास, मत, आस्था और सिद्धान्त धराशायी हो रहे हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आघातों से हिन्दुत्व को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसके मौलिक सिद्धान्तों का तार्किक आधार तथा शाश्वत प्रभाव है।
आर्य समाज जैसे कुछ संगठनों ने हिन्दुत्व को आर्य धर्म कहा है और वे चाहते हैं कि हिन्दुओं को आर्य कहा जाय। वस्तुत: 'आर्य' शब्द किसी प्रजाति का द्योतक नहीं है। इसका अर्थ केवल श्रेष्ठ है और बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य की व्याख्या करते समय भी यही अर्थ ग्रहण किया गया है। इस प्रकार आर्य धर्म का अर्थ उदात्त अथवा श्रेष्ठ समाज का धर्म ही होता है। प्राचीन भारत को आर्यावर्त भी कहा जाता था जिसका तात्पर्य श्रेष्ठ जनों के निवास की भूमि था। वस्तुत: प्राचीन संस्कृत और पालि ग्रन्थों में हिन्दू नाम कहीं भी नहीं मिलता। यह माना जाता है कि परस्य (ईरान) देश के निवासी 'सिन्धु' नदी को 'हिन्दु' कहते थे क्योंकि वे 'स' का उच्चारण 'ह' करते थे। धीरे-धीरे वे सिन्धु पार के निवासियों को हिन्दू कहने लगे। भारत से बाहर 'हिन्दू' शब्द का उल्लेख 'अवेस्ता' में मिलता है। विनोबा जी के अनुसार हिन्दू का मुख्य लक्षण उसकी अहिंसा-प्रियता है
हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दुरितीरित:।
एक अन्य श्लोक में कहा गया है
ॐकार मूलमंत्राढ्य: पुनर्जन्म दृढ़ाशय:
गोभक्तो भारतगुरु: हिन्दुर्हिंसनदूषक:।
ॐकार जिसका मूलमंत्र है, पुनर्जन्म में जिसकी दृढ़ आस्था है, भारत ने जिसका प्रवर्तन किया है, तथा हिंसा की जो निन्दा करता है, वह हिन्दू है।
चीनी यात्री हुएनसाग् के समय में हिन्दू शब्द प्रचलित था। यह माना जा सकता है कि हिन्दू' शब्द इन्दु' जो चन्द्रमा का पर्यायवाची है से बना है। चीन में भी इन्दु' को इन्तु' कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष में चन्द्रमा को बहुत महत्त्व देते हैं। राशि का निर्धारण चन्द्रमा के आधार पर ही होता है। चन्द्रमास के आधार पर तिथियों और पर्वों की गणना होती है। अत: चीन के लोग भारतीयों को 'इन्तु' या 'हिन्दु' कहने लगे। मुस्लिम आक्रमण के पूर्व ही 'हिन्दू' शब्द के प्रचलित होने से यह स्पष्ट है कि यह नाम मुसलमानों की देन नहीं है।
भारत भूमि में अनेक ऋषि, सन्त और द्रष्टा उत्पन्न हुए हैं। उनके द्वारा प्रकट किये गये विचार जीवन के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। कभी उनके विचार एक दूसरे के पूरक होते हैं और कभी परस्पर विरोधी। हिन्दुत्व एक उद्विकासी व्यवस्था है जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता रही है। इसे समझने के लिए हम किसी एक ऋषि या द्रष्टा अथवा किसी एक पुस्तक पर निर्भर नहीं रह सकते। यहाँ विचारों, दृष्टिकोणों और मार्गों में विविधता है किन्तु नदियों की गति की तरह इनमें निरन्तरता है तथा समुद्र में मिलने की उत्कण्ठा की तरह आनन्द और मोक्ष का परम लक्ष्य है।
हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को परम लक्ष्य मानकर व्यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के अवसर प्रदान करता है। हिन्दू समाज किसी एक भगवान की पूजा नहीं करता, किसी एक मत का अनुयायी नहीं हैं, किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रतिपादित या किसी एक पुस्तक में संकलित विचारों या मान्यताओं से बँधा हुआ नहीं है। वह किसी एक दार्शनिक विचारधारा को नहीं मानता, किसी एक प्रकार की मजहबी पूजा पद्धति या रीति-रिवाज को नहीं मानता। वह किसी मजहब या सम्प्रदाय की परम्पराओं की संतुष्टि नहीं करता है। आज हम जिस संस्कृति को हिन्दू संस्कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं । कोई किसी भगवान में विश्वास करे या किसी ईश्वर में विश्वास नहीं करे फिर भी वह हिन्दू है। यह एक जीवन पद्धति है; यह मस्तिष्क की एक दशा है। हिन्दुत्व एक दर्शन है जो मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं के अतिरिक्त उसकी मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकता की भी पूर्ति करता है।


सोशल मीडिया और वीडियो गेम के जमाने में हम आज अपने परम्परागत खेलों को शायद भूल गये हैं. मगर आज भी हमारे ग्रामीण क्षेत्रों ने कई पुराने खेलों को सहेज कर रखा है. इन खेलों में से एक है, चौसर. चौसर हमारे देश के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है. यह खेल बिसात पर चार रंगों की चार-चार गोटियों और तीन पासों से खेला जाता है. भोलेनाथ को थी चौसर में विशेष रुचि


 सबसे पहले द्रौपदी का हुआ पतन 

पांडव जब स्वर्ग जाने के लिए निकले तो रास्ते में ही द्रौपदी सहित भीम, अर्जुन, नकुल व सहदेव की मृत्यु हो गई। सिर्फ युधिष्ठिर ही सशरीर स्वर्ग जा पाए। ये बात हम सभी जानते हैं। लेकिन युधिष्ठिर के अलावा अन्य पांडवों व द्रौपदी की मृत्यु क्यों हुई, ये बात बहुत कम लोगों को पता है। आज हम आपको बता रहे हैं युधिष्ठिर कैसे पहुंचे सशरीर स्वर्ग और रास्ते में ही क्यों हो गई द्रौपदी व अन्य पांडवों की मृत्यु?

भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद महर्षि वेदव्यास की बात मानकर द्रौपदी सहित पांडवों ने राज-पाठ त्याग कर सशरीर स्वर्ग जाने का निश्चय किया। युधिष्ठिर ने परीक्षित का राज्याभिषेक कर दिया। इसके बाद पांडवों व द्रौपदी ने साधुओं के वस्त्र धारण किए और स्वर्ग जाने के लिए निकल पड़े। पांडवों के साथ-साथ एक कुत्ता भी चलने लगा। पांडवों ने पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने की इच्छा से उत्तर दिशा की ओर यात्रा की। यात्रा करते-करते पांडव हिमालय तक पहुंच गए। हिमालय लांघ कर पांडव आगे बढ़े तो उन्हें बालू का समुद्र दिखाई पड़ा। इसके बाद उन्होंने सुमेरु पर्वत के दर्शन किए




15 मई 2016 , नई दिल्ली । हिन्दू धर्मीय गाय को पूज्य मानते हैं, माता मानते हैं । तब भी गोदरेज समूह के अध्यक्ष अदी गोदरेज ने  गोमांसभक्षण का समर्थन करते हुए निष्कारण अंग्रेजों की दास बनी अपनी बुद्धि दिखाकर कहा है कि ‘वैदिक काल में भारतीय गोमांस खाते थे । हिन्दू धर्म में बीफ का कहीं भी विरोध नहीं है ।’ वेदों में अनेक स्थानों पर  गोमांसभक्षण की केवल निंदा ही नहीं की गई है, अपितु गोहत्या करनेवालों को कठोर दंड बताया है । गोदरेज पारसी समाज के हैं । पारसी धर्मग्रंथ ‘अवेस्ता’ के ‘यस्न, ३८.८’ की दूसरी पंक्ति में ‘गाय, बैल, तथा बछडे के मांस का भक्षण वर्ज्य कहा गया है । इसलिए केवल व्यवसायिक दृष्टीकोण सामने रखकर जानबूझकर करोडों हिन्दुआें के श्रद्धास्थान गोमाता के विषय में अपमानजनक वक्तव्य कर हिन्दुआें की धार्मिक भावनाएं आहत की हैं । इसलिए अदी गोदरेज पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए तथा हिन्दू मन्दिरों के गर्भगृह में स्त्रियों को प्रवेश देने के विषय में शासन तथा न्यायालय परस्पर धर्मपरंपरा भंग न करते हुए हिन्दू धर्म के शंकराचार्य अथवा काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में यह निर्णय लें । ये मांगे करते हुए सुबह १० से दोपहर १२ बजे दिल्ली के जंतर मंतर पर  ‘राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन’ किया गया , जिसमें सनातन संस्था, वैदिक उपासना पीठ, योग वेदांत सेवा समिति और हिंदू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता सम्मिलित हुए ।

     गोदरेज केवल मद्य-मांसविक्री करनेवाले उद्योगपतियों की टंकियां भरने के लिए ही इस प्रकार का विधान कर रहे हैं । देश के उद्योगों की चिंता करनेवाले गोदरेज नेे देश को धोखा देकर ९ सहस्र करोड रुपए लूटनेवाले मद्यसम्राट विजय मल्ल्या के विषय में मुंह क्यों बंद रखा है ? गोहत्या के कारण हिन्दू संस्कृति का नाश हो रहा है । गोदरेज को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि देश के आर्थिक विकास सहित हिन्दू संस्कृति की रक्षा और संवर्धन होना भी आवश्यक है । इसलिए हिन्दुआें की भावनाआें का आदर कर गोदरेज को हिन्दुआें की सार्वजनिक क्षमा मांगनी चाहिए अन्यथा हिन्दू गोदरेज समूह के सभी उत्पादनों का बहिष्कार करें, ऐसा आवाहन भी इस समय हिन्दुत्वनिष्ठों ने किया ।

* इस समय की गई अन्य मांगें ....

. देहली विश्‍वविद्यालय की पाठ्यपुस्तक में हुतात्मा भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, सूर्यसेन आदि क्रांतिकारियों को ‘आतंकवादी’ सिद्ध करनेवाले सर्व संबंधितों पर राष्ट्रपुरुषों का घोर अपमान करने के लिए अपराध प्रविष्ट करें ।

. ‘भूमाता ब्रिगेड’ जैसे धर्मविरोधी संगठनों के मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने हेतु धर्मविरोधी आंदोलन कर रहे हैं । ये आंदोलन राजनैतिक अवसरवादिता और प्रसिद्ध होने की लालसा के लिए किए जा रहे हैं । इसलिए ऐसे  प्रसिद्धीलोलुप आंदोलन कर सामाजिक शांति भंग करनेवाले पुरोगामियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए ।
     
                                                     
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