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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत ने आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए पूछा है कि 'क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. आपको लगता है कि आप जो मन में आया बोल सकते हैं?'गौरतलब है कि बुधवार को श्री श्री ने पिछले साल यमुना नदी के किनारे हुए तीन दिन के सम्मेलन के आयोजन के लिए सरकार और अदालत को जिम्मेदार ठहाराया था. उन्होंने कहा था कि यह तो सरकार और अदालत की गलती है कि उन्होंने इस कार्यक्रम की अनुमति दी.

दरअसल विशेषज्ञों की टीम ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के सामने इस बात की गवाही दी है कि कई सौ एकड़ में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की वजह से नदी का ताल पूरी तरह बर्बाद हो गया है. साक्ष्य में कहा गया कि इस नुकसान की भरपाई कम से कम 10 साल में हो पाएगी और इसमें करीब 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे.60 साल के श्री श्री की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने इन सभी आरोपों को नकारा है. रविशंकर ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि 'अगर किसी तरह का जुर्माना लगाना ही है तो केंद्र, राज्य और एनजीटी पर लगाया जाना चाहिए जिसने इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी. अगर यमुना इतनी ही नाज़ुक और पवित्र है तो उन्हें वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल करने से हमें रोकना चाहिए था.'गौरतलब है कि पिछले साल यमुना के किनारे हुए वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल का पर्यावरणविदों ने विरोध किया था. लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा था कि अब कार्यक्रम को रद्द करने के लिए बहुत देर हो चुकी है. इसके साथ ही कोर्ट ने रविशंकर की संस्था पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया था. उस वक्त श्री श्री ने कहा था कि उन्हें तो इस बात के लिए अवॉर्ड दिया जाना चाहिए कि दुनिया भर के लोगों को वह सबसे प्रदूषित नदियों में से एक के किनारे एकजुट कर पाए.
यही नहीं, इस कार्यक्रम के पहले दिन श्री श्री के साथ पीएम नरेंद्र मोदी मौजूद थे. आर्ट ऑफ लिविंग ने कहा है कि वह पर्यावरण के संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है और वह देश भर में इस मुद्दे पर विभन्न परियोजनाओं के साथ जुड़ी हुई है.

सूरत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को दो दिन के गुजरात दौरे के तहत सूरत पहुंचें. यहां उनका एक भव्य रोड शो हुआ. पीएम मोदी के रोडशो में 10 हजार बाइक सवार शामिल रहे. सड़कों पर जगह-जगह विशाल टीवी स्क्रीन लगे हुए थे और चमकदार रोशनी के बीच झंडे लहराते दिखे. पीएम मोदी खुली गाड़ी में खड़े होकर लोगों का अभिवादन करते हुए आगे बढ़ते रहे.

हवाई अड्डे और सर्किट हाउस के बीच करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पीएम मोदी सर्किट हाउस पहुंचे, जहां भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद वह रात में ठहरेंगे. पीएम के इस दौरे के मद्देनज़र बीजेपी ने ज़ोरदार तैयारियां की. सूरत को ख़ास तरीक़े से सजाया गया. यहां 12 किलोमीटर लंबी साड़ी तैयार की गई, जो एयरपोर्ट से लेकर सर्किट हाउस तक लगाई गई ळ्र. यही नहीं साड़ी पर भारत सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं की जानकारी भी बताई गई. यह साड़ी दुनिया की सबसे लंबी साड़ी बताई जा रही है. इससे पहले भरुच में 3050 मीटर की साड़ी बनाई गई थी.

सोमवार को प्रधानमंत्री 400 करोड़ रुपये की लागत वाले किरण मल्टी सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन करेंगे जिसका निर्माण एक ट्रस्ट ने किया है. मोदी इसके बाद जिले के इच्छापुर गांव में हीरा बोर्से एसईजेड जाएंगे जहां वह हरि कृष्ण एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की हीरा पॉलिशिंग इकाई का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री वहां से तापी जिले के बीजापुर गांव जाएंगे जहां वह सूरत जिला सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ के मवेशी चारा संयंत्र और आइसक्रीम संयंत्र का उद्घाटन करेंगे. सूरत जिला सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ सुमुल डेयरी के नाम से लोकप्रिय है.मोदी इसके साथ ही नवा पारदी में डेयरी उत्पाद संयंत्रों के लिए रिमोट से आधारशिला रखेंगे. सुमुल डेयरी के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी वहां पर एक सभा को भी संबोधित करेंगे. मोदी इसके बाद केंद्र शासित प्रदेश दादर एवं नगर हवेली स्थित सिलवासा जाएंगे जहां वह नई परियोजनाओं का उद्घाटन करने और लाभार्थियों को सहायता वितरित करने के अलावा एक सभा को भी संबोधित करेंगे. वहां पर केंद्र की विभिन्न योजनाओं के करीब 21000 लाभार्थियों को सहायता किट का वितरण किया जाएगा.
इसके बाद मोदी सौराष्ट्र के बोटाद जाएंगे जहां वह बोटाद और आसपास के जिलों के लिए साउनी परियोजना के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे. वह परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे. गत वर्ष अगस्त में मोदी ने महत्वाकांक्षी सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई (साउली) परियोजना के प्रथम चरण का जामनगर से उद्घाटन किया था. यह परियोजना चार चरणों में विभाजित है और इसके तहत गुजरात सरकार की योजना सौराष्ट्र क्षेत्र के 115 बांधों को नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के अतिरिक्त पानी से भरने की है.

यह मोदी का इस वर्ष उनके गृह राज्य का दूसरा दौरा है. उन्होंने इससे पहले आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देशभर से आई महिला सरपंचों को संबोधित करने के लिए गांधीनगर का दौरा किया था.

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ईवीएम और बूचड़खानों को बंद करने के मुद्दे पर बीजेपी, राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा है. लखनऊ में पार्टी ऑफिस में अखिलेश ने समाजवादी पार्टी सदस्यता अभियान की शुरुआत की.

2019 के ंआम चुनाव और आगामी राज्य विधानसभा चुनाव पर बोलते हुए अखिलेश ने कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए हम किसी के साथ भी गठबंधन को तैयार है, साथ ही उन्होंने कहा कि देशहित में जब भी कोई गठबंधन बनेगा उसमें समाजवादी पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी.

अखिलेश ने यूपी विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के लिए एक बार फिर से ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अभी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को विश्वास नहीं हो रहा है कि उन्होंने जो सपा को वोट दिए थे वो कहां चले गए? अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयोग को खराब ईवीएम के मुद्दे पर जबाव देना चाहिए

उत्तर प्रदेश में हजारों बूचड़खानों के बंद होने जाने से बेरोजगार हुए हजारों लोगों के मुद्दे पर पूर्व सीएम मे बीजेपी और राज्य सरकार पर जमकर भड़ास निकाली. अखिलेश ने कहा कि मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में बूचड़खानों को चलाने की इजाजत है तो यूपी में क्यों नहीं? यहां तक की उत्तर-पूर्व के राज्यों और गोवा में तो सबकुछ जायज है.

एंटी रोमिओ स्कवॉड पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार को ये दस्ता बनाने से पहले रोमिओ के बारे में जनता को जानकारी देनी चाहिए थी. उन्होंने एंटी रोमिओ स्कवॉड पर बेकार में जनता को परेशान करने का आरोप भी लगाया.

पूर्व बीजेपी विधायक माया कोडनानी को विशेष अदालत ने साल 2002 में नरोदा पाटिया नरसंहार मामले की सुनवाई में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को गवाह के तौर पर पेश करने की मंजूरी दे दी है. माया कोडनानी ने अमित शाह समेत कुल 14 लोगों को गवाह के तौर पर पेश करने के लिये याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है.
पूर्व बीजेपी विधायक इन गवाहों के जरिये कोर्ट में यह साबित करेंगी कि वह घटना के दौरान वहां पर मौजूद नहीं थी. माया की याचिका पर विशेष अदालत के जस्टिस पीबी देसाई ने कहा कि इन गवाहों को सुनवाई के उचित चरणों पर समन जारी करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कुछ गवाहों की गवाही दोहराने की संभावना आती है तो अन्य चरण में उन्हें नहीं बुलाने का भी विकल्प है. 

क्या है मामला?
गौरतलब है कि नरोदा पाटिया दंगा मामले में बीजेपी की पूर्व विधायक माया कोडनानी को 28 साल की कारावास की सजा सुनाई गई है. हालांकि वह अभी जमानत पर रिहा हैं. यह मामला गुजरात दंगों में से एक प्रमुख मामला है, जिसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई थी. इस दौरान कुल 11 अल्पसंख्यक लोगों की हत्या कर दी गई थी. जिसके बाद अभी मामले में कुल 82 लोगों का ट्रायल भी चल रहा है. माया कोडनानी पूर्व की गुजरात में मोदी सरकार में महिला बाल विकास कल्याण मंत्री रह चुकी हैं.

जाट समुदाय के हजारों लोग आज जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए इकट्ठा हुए हैं। इनकी मांग है कि इन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिया जाए। इस विरोध प्रदर्शन में हरियाणा, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और मध्यप्रदेश से जाट समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया है। बुधवार को जाट समुदाय ने असहयोग आंदोलन के तहत अपने लोगों से बिजली तथा पानी के बिल का भुगतान न करने तथा राष्ट्रीय राजधानी को दूध तथा अन्य जरूरी चीजें जैसे सब्जियां आदि की आपूर्ति बंद करने को कहा गया था।
असहयोग आंदोलन की शुरुआत करते हुए जाट नेताओं ने कहा कि पूरे हरियाणा में जाट कहीं भी बिजली-पानी का बिल नहीं जमा करेंगे और न बैंक का लोन चुकाएंगे। इसके साथ ही जाट अपनी मांगों को लेकर राष्‍ट्रपति को ज्ञापन देने वाले है। दिल्ली में आंदोलन के बारे पूछने पर यशपाल मलिक ने कहा, ’33 दिन से 10 लाख से ज़्यादा लोग धरने पर बैठे हैं। जब उससे कोई हल नहीं निकला तो हमें मजबूरन दिल्ली में प्रदर्शन कर घेराव की रणनीति घोषित करनी पड़ी।’

वहीं इस मामले पर राजनीति भी तेज भी हो गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि, ‘कांग्रेस और बीजेपी हरियाणा में जाटों को सरकारी नौकरियों और सरकारी संस्थानों में आरक्षण पर राजनीति करने का प्रयास कर रही हैं। राज्य की बीजेपी सरकार जाट समुदाय की मांगों को पूरा करने में विफल रही है, जबकि उसने पिछले साल इस पर सहमति जताई थी।’

जाट नेता आरक्षण के साथ-साथ मांग कर रहे हैं कि पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के घर में से किसी को नौकरी, आंदोलन में घायल हुए लोगों को मुआवजा मिले। वहीं आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए केस को वापस लिया जाए। पिछले साल हुए जाट आंदोलन के दौरान हिंसा में 30 लोग से ज्यादा लोग मारे गए थे वहीं 200 से ज्यादा घायल हो गए थे। इतना ही नहीं आंदोलन के दौरान हजारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान भी हुआ था।

लखनऊ में मायावती के बनाए जिन स्मारकों की सुध लेने वाला अखिलेश राज मे से कोई नहीं था, अचानक ही उन पार्कों और स्मारकों के दिन लौटने लगे हैं. यह चर्चा चल निकली है कि कहीं यह बहन जी के आने की आहट तो नही! करोड़ों रुपए खर्च कर फिर से पार्कों को चमकाया जा रहा है.

मायावती के बनाए कई स्मारकों में करीब 200 गेट लगाए गए थे. इनमें से कई टूटे पड़े थे. कभी इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं आया, लेकिन अब एकाएक इनकी भी मरम्मत होनी शुरू हो गयी है. करीब 50 फीसदी गेटों की मरम्मत कर उन्हें दुरुस्त किया जा चुका है. बाकी का काम चल रहा है.


मायावती की सरकार आती है कि नही इस सवाल का जवाब तो 11 मार्च को मिलेगा, लेकिन अधिकारियों का स्मारकों के लिए अचानक उमड़ा दर्द ये जरूर बताता है कि अधिकारी कोई चांस नहीं लेना चाहते. यही कारण है की चार साल से बेसुध पड़े स्मारकों का खयाल उन्हें अचानक से आ गया.

बदला अफसरों का रंग
सूबे के अधिकारी भी अपना रंग बदलते दिख रहे हैं. मायावती के शासन में बने स्मारक 2012 के बाद सुनसान दिखने शुरू हो गये थे. कहीं दीवारें टूट रही थीं, तो कहीं गेट. चार साल से अधिक समय से नज़रअंदाज़ होने के बाद अब एक बार फिर अधिकारियों को इसकी चिंता सताने लगी है.

पानी के लिए एक करोड़ की प्लम्बरिंग का सामान आ चुका. गेट और प्लंबरिंग का काम स्मारक समिति की ओर से किया जा रहा है.

नतीजों से पहले ही काम होगा पूरा 
सूत्रों का कहना है कि इन सभी कामों को 11 मार्च से पहले पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. आला अधिकारी जल्दी काम पूरा करने का दबाव बनाए हुए हैं. उन्होंने चुनाव नतीजे आने से पहले स्मारकों को दुरुस्त करने का आदेश दिए गए हैं.

वहीं सम्बंधित अधिकारियों का कहना है कि ये रूटीन का कार्य है. बजट जारी करने में देरी हुई थी, जिसके चलते काम देर में शुरू हुआ है.

अखिलेश राज में बेहाल रहे इन पार्कों और स्मारकों के दिन फिरने लगे हैं. अधिकारी इसे भले ही रूटीन काम करार दें, लेकिन जिन पार्कों मे पिछले पांच साल में कोई अधिकारी झांकने तक नहीं आया, वहां अधिकारियों की चहलकदमी ये साफ दिखाती है कि अधिकारी कोई चांस लेने के मूड में नहीं हैं.

लखनऊ: डिंपल यादव ने कुछ दिन पहले इलाहाबाद की रैली में भीड़ के दौरान कह दिया था 'डर लगता है'. इसी लाइन को लेकर विपक्ष ने जब राजनीति शुरू कर दी तो खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जवाब देने आना पड़ा. रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि अगर भाभी ने छोटे भाइयों से कहा कि आपकी शिकायत भैया से करेंगी तो गलत क्या कहा
.दरअसल, इलाहाबाद में डिंपल यादव की रैली के दौरान भारी भीड़ उमड़ आई थी. जिससे परेशान होकर डिंपल ने कहा था कि इस माहौल से डर लगता है. इस पर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए स्मृति ईरानी और मायावती ने उन पर निशाना साधा था. उल्लेखनीय है कि बीते 20 फरवरी को इलाहाबाद में डिम्पल की सभा में भीड़ बेकाबू हो गई थी. एक व्यक्ति उनकी फोटो ले रहा था जिस पर डिम्पल यादव ने कहा कि मैं आपकी शिकायत भैया से करूंगी.
यही नहीं डिंपल के बयान पर बसपा के पोस्टर को लेकर भी अखिलेश काफी गुस्से में दिखाई दिए. उन्होंने कहा कि बुआ जी को कहो अगर दिक्कत है तो कभी भी 1090 पर कॉल कर सकती है. दरअसल बीएसपी ने पोस्टर जारी करके कहा था कि डिंपल भाभी को सुरक्षा का अहसास कराने को बुआजी को आने दो.
वहीं स्मृति ईरानी ने भी वाराणसी की जनसभा के दौरान स्मृति ईरानी ने कहा था कि जब सीएम की पत्नी सपा के लोगों से इस कदर परेशान हो जाती हैं तो एक आम महिला को तो पता नहीं कितना कुछ सहन करना पड़ता होगा. इस पर डिंपल ने स्मृति पर तंज कसते हुए कहा था कि वह सिनेमा से जुड़ी है.


अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार कई मौकों पर एक साथ मंच साझा करते नज़र आ चुके हैं. हालांकि आने वाले दिनों में दिल्ली की सियासत में एक अलग ही तस्वीर देखने मिलेगी, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवारों के लिए दिल्ली में प्रचार करते नज़र आएंगे. दिलचस्प बात यह है कि 2 साल पहले विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था, लेकिन अब मामला पूरी तरह उलट गया है.

जनता यूनाइटेड दल का दिल्ली में प्रभार संभाल रहे संजय झा ने 'आजतक' से खास बातचीत में बताया कि जेडीयू दिल्ली नगर निगम के 272 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर चुकी है. उनका कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में जेडीयू के वोटर हैं और काफी पहले से जेडीयू का यहां आधार रहा है.
वह कहते हैं, जनता दल यूनाइटेड बिहार के साथ दिल्ली में आकर काम करना चाहती है. अब तक पूर्वांचलियों को बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सिर्फ सरकार बनाने के लिए इस्तेमाल किया है. यही वजह है कि जेडीयू में आम आदमी पार्टी के कई कार्यकर्ता शामिल हुए हैं.'
संजय झा ने साथ ही बताया कि नीतीश कुमार मार्च के महीने में होली के बाद दिल्ली आएंगे. वह साउथ, ईस्ट और नार्थ दिल्ली में नगर निगम चुनाव लड़ रहे जेडीयू उम्मीदवारों के समर्थन में बड़ी रैलियां करेंगे. झा बताते हैं कि मुख्यमंत्री के अलावा जेडीयू से जुड़े कई विधायक और मंत्री भी दिल्ली आकर प्रचार का हिस्सा बनेंगे.
हालांकि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल सरकार के खिलाफ नीतीश कुमार के प्रचार करने के सवाल पर संजय झा ने साफ़ कह दिया कि हर एक पार्टी का अलग-अलग विचार और आईडिया होता है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने कुछ काम नहीं किया, इसलिए जेडीयू ने नगर निगम चुनाव लड़ने का फैसला किया है.' जेडीयू का दावा है कि अब तक नगर निगम चुनाव के लिए वह 200 मीटिंग कर चुकी है और वह सीवर, पाAAP के बागियों का नया ठिकाना जेडीयू
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की विधानसभा पटपड़गंज के वार्ड 10E से टिकट न मिलने पर विनोद झा अपने कई समर्थकों के साथ जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए हैं. झा का आरोप है आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनाव के लिए पूर्वांचलियों को 272 में से 100 सीट देने का वादा किया था, लेकिन हाल ही में जारी हुई 109 उम्मीदवारों को लिस्ट में सिर्फ 2 से 3 पूर्वांचलियों को ही टिकट मिला है. झा ने बताया कि हाल ही में सारे पूर्वांचलियों ने गोवा और पंजाब में जाकर आम आदमी पार्टी के लिए प्रचार किया था, इसके बावजूद उनके इलाके में पूर्वांचलियों को हटाकर उत्तरांचली को जगह दी जा रही है.नी की समस्या को चुनाव में मुद्दा बनाएगी.



अखिलेश यादव ने कहा कि कौन है, जिसने पास होने के लिए थोड़ी- बहुत नकल नहीं की है
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को आड़े हाथ लिए, जिसमें मोदी ने कहा था कि नकल कराने के लिए स्कूलों के ठेके दिए जाते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि कौन है, जिसने पास होने के लिए थोड़ी- बहुत नकल नहीं की है।
वह (मोदी) खुद नकल करते हैं। एक बड़े व्यक्ति ने अपने नाम वाला सूट पहना था। मोदी ने भी अपने नाम वाला सूट पहनकर नकल की है, लेकिन वह दूसरों को सलाह दे रहे हैं। पीएम मोदी यहां नकल की बात उठा रहे थे, बीजेपी ने भी तो नकल की है, हमारे वादों की नकल।
पीएम कब्रिस्तान और श्मशान की बात कर रहे हैं और हम लैपटॉप व मोबाइल की बात कर रहे हैं। कल तीन पन्नों का भाषण दिया है मोदी ने, लेकिन एक भी बात बता दो, जो किसानों और गरीब के बारे में की हो।

सीएम अखिलेश ने कहा कि मैंने इतना झूठ बोलना वाला पीएम नहीं देखा, किसी ने देखा हो तो बताओ। ऐसा सपने दिखाने वाला प्रधानमंत्री
अखिलेश ने कहा कि हम पूछना चाहते हैं कि नोटबंदी का क्या फायदा हुआ, कब बताओगे। हम तो कहते हैं प्रधानमंत्री जी समाजवादियों से बहस कर लो, जो जगह तय करनी है कर लो। यादव ने कहा कि टीवी पर मन की बात, रेडियो पर मन की बात, हर जगह मन की बात लेकिन आज तक कोई नहीं समझ पाया बीजेपी के मन की बात।


  For one of her earliest and showiest rallies in Uttar Pradesh, four-time Chief Minister Mayawati chose Saharanpur, a constituency which perfectly snapshots her strategy for the election that hits its second phase on Wednesday. Saharanpur's population is 42% Muslims, 22% Dalits - the former is getting more attention from the 61-year-old than ever before, while the latter she hopes to tug back to her side after their significant desertion in the general election.Saharanpur votes on Wednesday, when Western Uttar Pradesh will pick 67 of the state's 403 legislators. Last week, 73 were elected.

For Mayawati, iconic Dalit leader, these are relatively easier rounds than the remaining five because she has traditionally been popular in the western part of the state, with its concentration of Dalits and Muslims. Saharanpur, a district with wood carving as its main stock-in-trade, cogently illustrates that: in the last state election, when Akhilesh Yadav scored a giant win, Mayawati won four of the seven constituencies here.To its south, Saharanpur borders Muzaffarnagar, which was relentlessly traversed by Muslim-Jat violence in 2013. Nearly 60 people were killed, most of them Muslim, thousands were forced to abandon their villages. The government of Akhilesh Yadav, the country's youngest Chief Minister, 37 years old at the time, was denounced for being unable to quickly check the violence, which lasted longer than 20 days. The army was brought in to restore calm.




























देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा की 71 सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान 15 फरवरी को होगा. इसलिए उत्तराखंड में चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है. आज शाम 5 बजे चुनावी शोर थम जाएगा.
  
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आज पीएम मोदी की दो रैलियां और हरिद्वार में राहुल गांधी का रोड शो होगा. पीएम नरेंद्र मोदी की एक जनसभा आज श्रीनगर में होगी. उत्तराखंड में वोटिंग 15 फरवरी को होगी. यहां की 71 विधानसभा सीट पर एक ही चरण में मतदान होगा.

Uttarakhand elections 2017: Prime Minister Narendra Modi. 
Prime Minister Narendra Modi addressed a rally in poll-bound Uttarakhand’s Rudrapur on Saturday. He slammed the opposition for asking for proof of surgical strikes India conducted across the Line of Control on terror launch pads last year. Speaking on corruption and black money, the prime minister said with the wishes of people of Uttarakhand, he has initiated the fight against this evil. Earlier in the day, the prime minister addressed a rally in Uttar Pradesh’s Badaun district, where he took on the Samajwadi party government, BSP and Congress. Attacking UP Chief Minister Akhilesh Yadav, PM Modi said, “Akhilesh branded Mayawati government corrupt five years ago and promised to send wrongdoers to jail. Did he do so?” He slammed the SP-Congress alliance as well saying, “Those opposed to each other have come together on one issue when I waged war on blackmoney as they felt they were losing foothold.”


Donald Trump is considering a new executive order to ban citizens of certain countries from travelling to the US after his initial attempt was overturned in the courts.
Mr Trump told reporters on Air Force One that a "brand new order" could be issued as early as Monday or Tuesday.
It comes after an appeals court in San Francisco upheld a court ruling to suspend his original order.
It barred entry from citizens from seven mainly Muslim countries.
It is unclear what a new US immigration order might look like.
Mr Trump said that it would change "very little", but he did not provide details of any new ban under consideration.
Despite his suggestion on Friday, Mr Trump's administration may still pursue its case in the courts over the original order, which was halted a week ago by a Seattle judge.

UTTAR PRADESH:  Polling is being held in 73 assembly constituencies in Western Uttar Pradesh today in the first of seven phases of what is billed as a semi-final before the 2019 national election. A voter turnout of 39.34 per cent was recorded till 1 pm. The pressure today is on the BJP which swept the region in the 2014 national election, but now faces a test of Prime Minister Narendra Modi's notes ban, that resulted in a cash crunch seen to hit hardest the rural poor, who make up a big chunk of UP's voters. Opponents like Chief Minister Akhilesh Yadav's Samajwadi Party and partner Congress and Mayawati's BSP have spared no chance to attack the BJP on the impact of demonetisation. The BJP is also said to face some anger among the Jats of western UP who had voted en masse for it three years ago but now accuse the ruling party of not fulfilling promises it made then like reservation in government jobs for the community. UP has 403 seats and votes for all seven phases will be counted on March 11.



After the adjournment, Mr. Modi was seen being greeted by a large number of BJP MPs, who had queued up along the aisle.

As the Opposition braced up to challenge the government on the demonetisation issue, Prime Minister Narendra Modi on Wednesday reached out to them in the Lok Sabha on the first day of the winter session of Parliament and exchanged greetings with various leaders, including Congress chief Sonia Gandhi.

Before the proceedings began, Mr. Modi met BJP leaders, including L K Advani and Murli Manohar Joshi, and leaders of allied parties, Ram Vilas Paswan and Ashok Gajapati Raju.

Accompanied by Home Minister Rajnath Singh and Parliamentary Affairs Minister Ananth Kumar, the Prime Minister then walked up to the Opposition benches to meet Congress president Sonia Gandhi and exchanged pleasantries with her. He was also seen interacting with TMC leaders Sudip Bandyopadhyay and Kalyan Banerjee.

Mr. Modi spoke briefly to Deputy Speaker of Lok Sabha M Thambidurai and Congress leader in the Lok Sabha Mallikarjun Kharge.

The Home Minister was seen talking to Ms. Gandhi for some time after exchanging pleasantries.

Mr. Rajnath Singh, Mr. Kumar and Minister of State for Parliamentary Affairs S S Ahluwalia were also seen talking to the leaders of the TMC, which has upped the ante against the Prime Minister’s demonetisation move.

After the House was adjourned, Mr. Modi was seen being greeted by a large number of BJP members, who had queued up along the aisle.

Meets media

Earlier, before the winter session began, the Prime Minister addresses the media .He thanks the Opposition parties for allowing the passage of the GST Bill in the previous session. He assures that the winter session would see "a very positive discussion" on all issues. He asserts that the government believes in debating every issue in an "open manner."


If anybody wants a merger SP is ready for it.

Amid talks of a Bihar-like anti-BJP mahagathbandhan shaping up in Uttar Pradesh, Samajwadi Party chief Mulayam Singh on Thursday ruled out any alliance in the State for the coming Assembly polls.

Responding to a question by reporters here, Mr. Singh, however, said his party was open to mergers. “The SP will not engage in any alliance, if anybody wants a merger, we will do that,” the SP chief said at a press conference convened to address his point on the demonetisation issue.

Mr. Singh’s comments came a day after his son, Chief Minister Akhilesh Yadav had said though his party could fight alone, in presence of an alliance it would clear the 300 seat mark in the 403-seat UP Assembly. The Yadav scion had said the final call on an alliance would be taken by his father, even as it is known that his uncle Shivpal Yadav favours the coming together of all socialist parties.

SP sources, however, indicated that by publicly dismissing the chances of an alliance, Mr. Singh was merely engaging in ‘pressure politics.’ The sources also said that with talks of a united front against the BJP, the SP was hoping for a consolidation of Muslim voters, which the BSP has been aggressively wooing.

Speculations have been rife of a SP and Congress alliance, along with the RLD and a few other regional parties, after the appearance of erstwhile Janata Party members at the SP’s silver jubilee function and the meetings of Congress poll strategist Prashant Kishor with both Akhilesh and Mulayam. At the November 5 event, the Janata Parivar leaders pitched for the need to unite against the BJP and also to forge a collective opposition for the 2019 Lok Sabha elections.

Mr. Mulayam himself raised the call for a united front, saying there was a “need to rethink unitedly” about the nation’s problems. The event was attended by former Bihar CM Lalu Prasad Yadav, former Prime Minister H.D Deve Gowda, RLD chief Ajit Singh, Indian National Lok Dal leader Abhay Chautala, Janata Dal (United)’s Sharad Yadav and noted lawyer Ram Jethmalani.

Taking a dig at the SP for trying to forge an alliance in UP, BSP chief Mayawati termed it an admission of defeat. She also reiterated that her party would “not enter into any political understanding with any party” in UP, Uttarakhand or Punjab.


Two people died in the violent protests that marred the inaugural birth anniversary celebrations of the former Mysore ruler last year.
BJP workers Thursday staged a protest against the celebration of Tipu Sultan Jayanti in Karnataka, and demanded an NIA probe into the killing of 17 party workers and activists from various right-wing organisation in the last one year. A few protesters have been detained by police today.

“Over 17 party workers and activists from various Hindu organisations have been killed in the last one year. Some were killed during the Tipu Sultan Jayanti held at Madikeri last year. It is repeating this year as well. We have requested the Home Minister to initiate NIA probe into the killings,” State BJP president B S Yeddyurappa said. The party is observing Thursday as “black day”. They believe that a few “anti-nationals” have allegedly killed its activists. Two people died in the violent protests that marred the inaugural birth anniversary celebrations of the former Mysore ruler last year.

Karnataka government deployed 119 KSRP platoons, 9,000 Home Guards, and 7 companies of Central forces across the state to avoid any untoward incident. “Senior officers of the rank of Additional Director-General of Police and Inspector-General of Police have been dispatched to all districts to supervise security measures,” Om Prakash, Director-General and Inspector-General of Police, told The Hindu.

State Home Minister G Parameshwara appealed for cooperation from the BJP, but it appears to have fallen on deaf years.
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