Showing posts with label uttar pradesh. Show all posts



हाल में गोरखपुर के एक अस्पताल में बच्चों की मौतों के कारण विवादों में रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है, "अगर मैं सड़क पर ईद के दिन नमाज़ पढ़ने से रोक नहीं लगा सकता तो मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं थानों में जन्माष्टमी के पर्व को रोकूं... मुझे इसका कोई अधिकार नहीं है."

ये ख़बर छापी है अख़बार एक 'इंडियन एक्सप्रेस' ने.

अख़बार के अनुसार आरएसएस के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. योगी ने कहा, "कांवड़ यात्रा पर अधिकारियों ने मुझे बताया कि यात्रा में माइक्रोफ़ोन, डीजे और म्यूज़िक सिस्टम पर रोक लगाई जाएगी तो मैंने उनसे ये उनसे ये सुनिश्चित करने के लिए कहा कि माइक्रोफोन का इस्तेमाल प्रतिबंधित है और किसी भी पूजास्थल से ध्वनि प्रदूषण नहीं होना चाहिए."

योगी बताया कि इस पर उन्होंने अधिकारियों से कहा था, "मैंने कहा कि अफसर ये सुनिश्चित ये कांवड़ यात्रा है कि शव यात्रा? अरे कांवड़ यात्रा में बाजे नहीं बजेंगे, डमरू नहीं बजेंगे, ढोल नहीं बजेंगे, चिमटे नहीं बजेंगे, लोग नाचेंगे-गाएंगे नहीं, माइक नहीं बजेगा तो वो यात्रा कांवड़ यात्रा कैसे होगी?"

उन्होंने कहा कि भारत में सभी धर्म को लोगों को अपनी आस्था का पालन करने की आज़ादी है

गोरखपुर (जेएनएन)। बाबा राघवदास मेडिकल कालेज की त्रासदी में अपने पुत्र को गंवा देने वाले बिहार के शख्स ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। फिलहाल उसकी तहरीर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 
बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में बीते दिनों ऑक्सीजन समाप्त होने के कारण अपने बच्चे की मौत से आहत एक व्यक्ति आज गुलहरिया थाना पहंच गया। बिहार के गोपालगंज के रहने वाले एक पिता ने अपने बच्चे की मौत पर न्याय मांगते हुए प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य व प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के खिलाफ गुलहरिया थाने में तहरीर दी है। 
बिहार गोपालगंज के ग्राम मोतीपुर हराजी थाना भोरे के रहने वाले मैनेजर राजभर की पत्नी ने सात अगस्त को बेटे को जन्म दिया था।
इसके बाद दस अगस्त को राजभर ने गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में अपने बच्चे को भर्ती करा दिया। मेडिकल कॉलेज पहुंचकर अपने नवजात शिशु को एडमिट कराया और इलाज भी शुरू हो गया। 11 अगस्त की रात बच्चे की सांस तेज चलने लगी।
कुछ घंटे बाद ही मैनेजर राजभर और उनकी पत्नी सुनीता को डॉक्टरों ने बुलाया और कहा कि बच्चा गंभीर है और उसकी हालत नाजुक है। इसके बाद कुछ मिनटों में ही बीआरडी के डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनके बच्चे की मौत हो गई है।
उसकी तहरीर पर पुलिस ने अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी। पुलिस ने मैनेजर राजभर को उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए थाना से लौटा दिया। 

Powered by Blogger.