बस्तर की कला, संस्कृति और जनजातीय जीवनशैली को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका
NAI महासचिव विपिन गौड़ से मुलाकात में जनजातीय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और बदलते बस्तर पर हुई विस्तृत चर्चा
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता केदार कश्यप ने कहा कि देश की जनजातीय संस्कृति और परंपराएं भारत की समृद्ध सभ्यता का अभिन्न हिस्सा हैं। जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और विरासत का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं और इसी सोच के साथ जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
नई दिल्ली में Newspaper Association of India (NAI) के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार विपिन गौड़ से मुलाकात के दौरान केदार कश्यप ने यह बात कही। दोनों के बीच छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक सशक्तिकरण, विकास, बदलते बस्तर और क्षेत्र की सकारात्मक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
सदियों पुराने पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी
केदार कश्यप ने कहा कि भारत का जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीता आया है। जंगल, जल, जमीन और प्रकृति के संरक्षण से जुड़ा जनजातीय समाज का पारंपरिक ज्ञान आज के समय में भी अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों की लोककला, लोकभाषाएं, रीति-रिवाज, परंपराएं और जीवनशैली केवल संबंधित समुदाय की पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास से जोड़ना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
विकास के साथ अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहे जनजातीय समाज
कश्यप ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों के साथ शिक्षा, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सशक्तिकरण को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। उद्देश्य ऐसा विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें जनजातीय समाज आधुनिक सुविधाओं और नए अवसरों का लाभ लेकर आगे बढ़े और साथ ही अपनी जड़ों, परंपराओं तथा सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करे।
उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। इससे नई पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व करते हुए राष्ट्र और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएगी।
बदल चुका है बस्तर, अब देश-दुनिया में बन रही सकारात्मक पहचान
बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए केदार कश्यप ने कहा कि आज का बस्तर तेजी से बदल रहा है। कभी जिन क्षेत्रों की चर्चा नक्सल हिंसा और चुनौतियों के कारण होती थी, आज वहां विकास, विश्वास, शांति, पर्यटन, खेल, शिक्षा, संस्कृति और जनजातीय प्रतिभाओं की नई कहानियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आज बस्तर की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोककला, परंपराओं और यहां के लोगों की प्रतिभा एवं सामर्थ्य से हो रही है। यह बदलाव पूरे देश के सामने प्रभावी रूप से आया है और इसमें मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
कश्यप ने कहा कि बस्तर की छवि में आया सकारात्मक परिवर्तन केवल विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि यहां के जनजातीय समाज के आत्मविश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति बढ़े विश्वास का भी प्रतीक है। अब आवश्यकता इस बात की है कि नए और विकसित होते बस्तर की इस सकारात्मक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक विस्तार दिया जाए।
बस्तर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मीडिया का मिला भरपूर सहयोग
केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के बदलते स्वरूप और यहां के जनजातीय समाज की सकारात्मक तस्वीर को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में मीडिया ने महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई है। मीडिया के माध्यम से आज देश बस्तर को नए नजरिए से देख रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को जब देश की राष्ट्रपति से मिलने और अपनी संस्कृति, जीवनशैली तथा क्षेत्र में आ रहे बदलावों को साझा करने का अवसर मिला, तब मीडिया ने इसे प्रमुखता से देश के सामने रखा। इसी प्रकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बस्तर के जनजातीय समाज के लोगों की मुलाकात और संवाद को भी मीडिया ने व्यापक स्थान दिया। इससे बस्तर के जनजातीय समाज की आवाज और क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों को राष्ट्रीय मंच मिला।
उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर मीडिया के भरपूर सहयोग ने बस्तर के प्रति देश की धारणा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग बस्तर की संस्कृति, पर्यटन, जनजातीय परंपराओं और वहां हो रहे बदलावों के बारे में जान रहे हैं।
अब नए बस्तर की कहानी और मजबूती से देश-दुनिया तक पहुंचानी है
कश्यप ने कहा कि बस्तर की छवि अब पूरी तरह बदल रही है। नक्सलवाद समाप्त होने के बाद शांति और विकास का वातावरण स्थापित हुआ है। ऐसे समय में बस्तर की नई पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास के साथ-साथ पर्यटन की संभावनाएं बढ़ रही हैं, स्थानीय कला और हस्तशिल्प को नए बाजार मिल रहे हैं, युवा खेल और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं तथा जनजातीय संस्कृति के प्रति देश-दुनिया की रुचि बढ़ रही है। इन सकारात्मक परिवर्तनों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मीडिया की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि मीडिया ने अब तक बस्तर के परिवर्तन को देश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सहयोग किया है। इस प्रयास को और बेहतर तथा व्यापक बनाया जा सकता है, ताकि बस्तर की प्रत्येक सकारात्मक उपलब्धि, जनजातीय प्रतिभा, सांस्कृतिक विशेषता और विकास की कहानी देश के कोने-कोने तक पहुंचे।
बस्तर की कला-संस्कृति बने राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान
केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, परंपराएं और जनजातीय जीवनशैली छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की विशिष्ट पहचान हैं। बस्तर का लोकनृत्य, लोकसंगीत, हस्तशिल्प, वन आधारित जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ जनजातीय समाज का संबंध दुनिया के लिए भी आकर्षण और अध्ययन का विषय है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की सकारात्मक पहचान जितनी व्यापक होगी, उतना ही यहां पर्यटन, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और जनजातीय कलाकारों को लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
विकास और संस्कृति की सकारात्मक कहानियों का मजबूत माध्यम है मीडिया
कश्यप ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ होने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन की कहानियों को व्यापक मंच देने का सशक्त माध्यम है। बस्तर के संदर्भ में मीडिया ने अपनी इस भूमिका को प्रभावी तरीके से निभाया है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि बस्तर के गांवों से निकल रही सफलता की कहानियां, जनजातीय युवाओं की उपलब्धियां, खिलाड़ियों की प्रतिभा, स्थानीय कलाकारों का हुनर, पर्यटन की संभावनाएं और क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तन राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सामने आते रहें।
उन्होंने विश्वास जताया कि मीडिया के सहयोग से बस्तर की नई और सकारात्मक पहचान आने वाले समय में देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और मजबूत होगी।
विपिन गौड़ ने की बस्तर में आए सकारात्मक बदलाव की सराहना
Newspaper Association of India के महासचिव विपिन गौड़ ने केदार कश्यप के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत और विशेष रूप से बस्तर की संस्कृति भारत की सभ्यतागत विरासत का अनमोल हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति, विकास और जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में जो सकारात्मक बदलाव आया है, उसे देश के सामने और प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जनजातीय समुदायों की कला, संस्कृति, प्रतिभा, उपलब्धियों और बदलते जीवन को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने में मीडिया निरंतर अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और वहां हो रहे सकारात्मक बदलावों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक स्थान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सरकार, समाज और मीडिया मिलकर मजबूत करेंगे बस्तर की नई पहचान
मुलाकात के दौरान जनजातीय सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पत्रकारिता, बस्तर की बदलती पहचान तथा आदिवासी समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अवसर और प्रतिनिधित्व दिलाने सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय समाज का विकास और उसकी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। इसके लिए सरकार, समाज और मीडिया के बीच सकारात्मक समन्वय महत्वपूर्ण है।
केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर बदल चुका है और अब इस बदले हुए बस्तर की सकारात्मक कहानी को पूरे देश और दुनिया तक पहुंचाने का समय है। शांति और विकास के नए वातावरण में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, कला, प्रतिभा और उपलब्धियों को नई पहचान दिलाने में मीडिया की बड़ी भूमिका है।
मुलाकात सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई। इस दौरान बस्तर की कला, संस्कृति, जनजातीय समाज की उपलब्धियों और विकास की नई तस्वीर को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से सामने लाने के लिए निरंतर प्रयास करने पर विशेष जोर दिया गया।

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